डायबिटीज के निदान में HbA1c टेस्ट की विश्वसनीयता पर सवाल
डायबिटीज का बढ़ता खतरा
डायबिटीज एक गंभीर और तेजी से बढ़ती हुई बीमारी है, जो वैश्विक स्तर पर बच्चों और बुजुर्गों को प्रभावित कर रही है। जब रक्त शर्करा का स्तर सामान्य से अधिक रहता है, तो यह शरीर को अंदर से कमजोर कर सकता है। इसके परिणामस्वरूप, शुगर के मरीजों को नसों, आंखों, किडनी और दिल से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। भारत में, 101 मिलियन से अधिक लोग डायबिटीज से ग्रसित हैं, जबकि 130 मिलियन से ज्यादा लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं, जिससे भविष्य में इस बीमारी का खतरा बढ़ सकता है। इस बढ़ते खतरे के कारण भारत को 'दुनिया का डायबिटीज कैपिटल' कहा जाने लगा है।
शुगर की नियमित जांच का महत्व
डायबिटीज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते। कई लोग बिना जानकारी के लंबे समय तक इस बीमारी के साथ जीते रहते हैं। इसलिए, नियमित रूप से रक्त शर्करा की जांच कराना आवश्यक है। HbA1c टेस्ट को शुगर की जांच के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है, लेकिन क्या यह वास्तव में विश्वसनीय है?
HbA1c टेस्ट की विश्वसनीयता
हाल ही में एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि HbA1c टेस्ट पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से, एनीमिया, क्रोनिक किडनी रोग और पोषण की कमी वाले व्यक्तियों में इसके परिणाम विश्वसनीय नहीं माने जाते। HbA1c टेस्ट, जो पिछले 2 से 3 महीनों में रक्त में शुगर के स्तर का औसत बताता है, को डॉक्टर डायबिटीज की पहचान और गंभीरता को समझने के लिए उपयोगी मानते हैं।
रिपोर्ट में क्या कहा गया है
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय चिकित्सा प्रथाओं में HbA1c टेस्ट को टाइप-2 डायबिटीज की पहचान और निगरानी के लिए उपयोगी माना जाता है। हालांकि, आयरन की कमी, एनीमिया, और अन्य रक्त विकारों वाले लोगों में इसके परिणामों पर सवाल उठाए गए हैं।
एनीमिया के प्रभाव
एक अध्ययन में यह पाया गया है कि HbA1c टेस्ट पर निर्भर रहना गलत परिणाम दे सकता है, खासकर उन लोगों में जिनमें एनीमिया या आनुवांशिक रक्त विकार हैं। भारत में 57% से अधिक महिलाएं आयरन की कमी से जूझ रही हैं, जिससे HbA1c टेस्ट के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि डायबिटीज के सही निदान के लिए HbA1c टेस्ट के साथ-साथ फ्रुक्टोसामाइन और ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट भी कराना चाहिए। जिन लोगों को आनुवांशिक रूप से डायबिटीज का खतरा है और एनीमिया जैसी समस्याएं हैं, उन्हें अन्य शुगर जांचें भी करानी चाहिए ताकि रक्त शर्करा के स्तर का सही अनुमान लगाया जा सके।
