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डेटिंग की चुनौतियाँ: आधुनिक जीवनशैली में रिश्तों की जटिलताएँ

आज की डेटिंग की दुनिया में चुनौतियाँ बढ़ गई हैं। डिजिटल युग में विकल्पों की भरमार और धैर्य की कमी ने रिश्तों को जटिल बना दिया है। डॉ. सिद्धार्थ वारियर के अनुसार, लोग एक साथ कई सवालों के जवाब खोजने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे निर्णय लेना कठिन हो गया है। जानें कि कैसे समय की कमी, अधिक विकल्प और डोपामाइन का प्रभाव डेटिंग को प्रभावित कर रहा है। इस लेख में हम इन समस्याओं के पीछे के वैज्ञानिक कारणों पर भी चर्चा करेंगे।
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डेटिंग की चुनौतियाँ: आधुनिक जीवनशैली में रिश्तों की जटिलताएँ

डेटिंग की जटिलताएँ

यदि आपको आज के समय में डेटिंग अधिक जटिल और निराशाजनक लगती है, तो आप अकेले नहीं हैं। अधिकांश लोग इसी तरह की भावनाओं का सामना कर रहे हैं। वर्तमान डिजिटल युग में, डेटिंग अब केवल दो व्यक्तियों के बीच की केमिस्ट्री तक सीमित नहीं रह गई है। इसमें कई विकल्प, निरंतर मोबाइल से ध्यान भटकाना, धैर्य की कमी और 'शायद कोई और बेहतर हो' का दबाव शामिल हो गया है। ये सभी कारक हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल रहे हैं, जिससे डेटिंग पहले से कहीं अधिक कठिन और भावनात्मक रूप से थका देने वाली हो गई है।


डॉ. सिद्धार्थ वारियर का दृष्टिकोण

मुंबई के न्यूरोलॉजिस्ट और यूट्यूब कंटेंट क्रिएटर डॉ. सिद्धार्थ वारियर इस बदलाव को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाते हैं। वे न्यूरोसाइंस, मानसिक स्वास्थ्य और मानव व्यवहार पर आधारित जानकारी साझा करते हैं। एक इंस्टाग्राम वीडियो में, उन्होंने बताया कि आज की डिजिटल जीवनशैली और हमारे बदलते व्यवहार ने सही साथी को खोजने को कितना कठिन बना दिया है।


डेटिंग में कठिनाई के कारण

डेटिंग क्यों हुई कठिन?

डॉ. वारियर के अनुसार, आज डेटिंग इसलिए चुनौतीपूर्ण हो गई है क्योंकि लोग एक साथ दो सवालों के उत्तर खोजने की कोशिश कर रहे हैं। पहला सवाल है, 'क्या यह व्यक्ति मेरे लिए सही है?' और दूसरा, 'क्या इससे बेहतर कोई और है?' पहले, रिश्ते में प्रवेश करते समय केवल पहले सवाल पर ध्यान केंद्रित किया जाता था, लेकिन अब दिमाग को दोनों सवालों पर एक साथ विचार करना पड़ता है, जो आसान नहीं है।


समय की कमी

समय की कमी

किसी व्यक्ति को सही से समझने के लिए समय की आवश्यकता होती है। उनके अच्छे और बुरे पहलुओं को जानने के लिए धैर्य जरूरी है। लेकिन आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में लोग किसी को समय देने के लिए तैयार नहीं हैं। जल्दी में निर्णय लिया जाता है और थोड़ी सी परेशानी आने पर आगे बढ़ने का मन बन जाता है।


अधिक विकल्प, अधिक भ्रम

अधिक विकल्प, अधिक भ्रम

दूसरे सवाल, 'क्या कोई और बेहतर है?' का मुख्य कारण डेटिंग ऐप्स हैं। एक स्वाइप में सैकड़ों प्रोफाइल दिखाई देती हैं, जिससे यह धारणा बन जाती है कि हमेशा कोई और विकल्प उपलब्ध है। इस स्थिति में किसी एक व्यक्ति पर ध्यान केंद्रित करना और पूरी तरह से समर्पित होना कठिन हो जाता है।
डॉ. वारियर बताते हैं कि जब तक आप अन्य विकल्पों को देखना बंद नहीं करते, तब तक दिमाग को यह विश्वास नहीं होता कि यही सही व्यक्ति है। लेकिन डेटिंग ऐप्स हमें लगातार नए विकल्पों की ओर आकर्षित करते हैं।


डोपामाइन का प्रभाव

डोपामाइन का खेल

नए रिश्ते की शुरुआत में जो उत्साह और खुशी मिलती है, वह दिमाग में डोपामाइन नामक रसायन के कारण होती है। लेकिन समय के साथ यह प्रारंभिक उत्साह कम हो जाता है। तब दिमाग फिर से नई उत्तेजना की तलाश में लग जाता है। यही कारण है कि लोग नए लोगों की ओर आकर्षित होते हैं। यह कनेक्शन बनाने से ज्यादा, उस सुखद अनुभव की खोज बन जाता है।


न्यूरोसाइंस का दृष्टिकोण

न्यूरोसाइंस क्या कहती है?

डॉ. वारियर प्यू रिसर्च सेंटर के एक अध्ययन का उल्लेख करते हैं, जिसमें लगभग आधे प्रतिभागियों ने माना कि पिछले 10 वर्षों में डेटिंग अधिक कठिन हो गई है। इसके पीछे घोस्टिंग, ऑनलाइन बदतमीजी और बेवफाई का डर बताया गया है।
वे बताते हैं कि न्यूरोसाइंस के अनुसार, नया रिश्ता दिमाग को नशे जैसा अनुभव देता है। लेकिन जैसे-जैसे नयापन खत्म होता है, रिश्ता मजेदार से अधिक मेहनत जैसा लगने लगता है। डॉ. वारियर के अनुसार, रिश्ते तभी सफल होते हैं जब दोनों लोग लंबे समय तक मेहनत करने के लिए तैयार हों। असली प्रतिबद्धता एक-दूसरे से कम और उस पूरी प्रक्रिया से अधिक होती है।