थैलेसीमिया: एक आनुवंशिक रक्त विकार की जानकारी
थैलेसीमिया क्या है?
दुनिया में कई बीमारियाँ ऐसी हैं जो समय के साथ ठीक हो जाती हैं, लेकिन कुछ बीमारियाँ स्थायी रूप ले लेती हैं। थैलेसीमिया एक ऐसी ही आनुवंशिक रक्त विकार है, जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन का निर्माण कम होता है, जिससे एनीमिया (रक्त की कमी) हो जाती है। थैलेसीमिया के दो प्रकार होते हैं: माइनर और मेजर। माइनर थैलेसीमिया में लक्षण सामान्यतः दिखाई नहीं देते या बहुत हल्के होते हैं, जबकि मेजर थैलेसीमिया का कोई स्थायी इलाज नहीं है और इसके लिए जीवनभर रक्त चढ़वाने की आवश्यकता होती है।
थैलेसीमिया का प्रसार
यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में जीन के माध्यम से फैलती है और यह संक्रामक नहीं है। थैलेसीमिया एक ऑटोसोमल रिसेसिव विकार है, जिसका अर्थ है कि यह तब होता है जब बच्चे को दोनों माता-पिता से एक-एक दोषपूर्ण जीन मिलता है।
माइनर थैलेसीमिया: यदि बच्चे को केवल एक माता-पिता से दोषपूर्ण जीन मिलता है, तो वह थैलेसीमिया माइनर (कैरियर) कहलाता है।
मेजर थैलेसीमिया: यदि दोनों माता-पिता कैरियर हैं, तो बच्चे को 25% मेजर थैलेसीमिया होने का खतरा होता है। मेजर थैलेसीमिया वाले बच्चों को अक्सर जीवनभर रक्त चढ़वाने की आवश्यकता होती है, क्योंकि उनका शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता।
थैलेसीमिया के लक्षण
थैलेसीमिया के लक्षणों में थकान, कमजोरी, सांस फूलना, चक्कर आना और त्वचा का पीला पड़ना शामिल हैं। इसके अलावा, थैलेसीमिया से प्रभावित बच्चों का विकास धीमा हो सकता है, लीवर का आकार बढ़ सकता है, और लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने के कारण पेशाब का रंग गहरा हो सकता है।
थैलेसीमिया का उपचार
वर्तमान में, स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (बोन मैरो ट्रांसप्लांट) ही एकमात्र ऐसा उपचार है जो थैलेसीमिया को समाप्त कर सकता है, लेकिन यह एक महंगी प्रक्रिया है, जिसकी लागत 10 लाख से 40 लाख रुपए तक हो सकती है। इसके अलावा, रक्त चढ़ाना, आयरन केलशन थेरेपी, फोलिक एसिड, या स्प्लेनेक्टोमी सर्जरी के माध्यम से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।
