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दवाओं की लत: खुद डॉक्टर बनना हो सकता है खतरनाक

दवाओं का अनियंत्रित सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। अक्सर लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेते हैं, जिससे कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इस लेख में जानें कि कैसे दवाओं की लत से बचें और अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित रखें। विशेषज्ञों के सुझाव और उपायों के साथ, आप एक स्वस्थ जीवनशैली अपना सकते हैं।
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दवाओं की लत: खुद डॉक्टर बनना हो सकता है खतरनाक

दवाओं का अनियंत्रित सेवन


(हेल्थ कार्नर) :- बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का सेवन भले ही आपको तात्कालिक राहत दे, लेकिन यह आदत गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकती है। क्या आप खुद को डॉक्टर समझने लगे हैं? सिरदर्द या पेटदर्द होने पर बिना सोचे-समझे दवा लेना आपकी आदत बन गई है। यदि आप ऐसा लंबे समय से कर रहे हैं, तो यह संकेत है कि आप दवाओं के आदी हो चुके हैं, जो आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना सलाह के दवा लेने से कई साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे कि मेडिकेशन ऐसिड रिएक्शन, हार्टबर्न, पेट के अल्सर, किडनी और लिवर को नुकसान, और यहां तक कि हार्ट अटैक भी हो सकता है।


दवाओं के दुष्प्रभाव

दवाओं की लत: खुद डॉक्टर बनना हो सकता है खतरनाक


जयपुर के सवाईमानसिंह अस्पताल के फिजिशियन श्रीकांत शर्मा के अनुसार, लोग पेन किलर्स, एंटीडिप्रेशंट्स और कफ सिरप के आदी हो सकते हैं। यह समस्या तब शुरू होती है जब लोग अपने इलाज के लिए खुद ही दवा लेने लगते हैं। नींद की गोलियां और एंटीबायोटिक्स का अनियंत्रित सेवन आपके लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। खासकर जब आपको यह नहीं पता होता कि आप कौन से विशेष यौगिक ले रहे हैं, उनकी कितनी मात्रा लेनी है, और कब तक लेनी है। इस भ्रम में आप और अधिक बीमार हो सकते हैं।


महिलाओं में अधिक लापरवाही

दर्द निवारक से नुकसान


महिलाएं अक्सर दर्द होने पर बिना किसी सलाह के दवा ले लेती हैं। दर्द निवारक दवाओं का अनियंत्रित सेवन पेट, कान, त्वचा, रक्त, मूत्र, कब्ज, और नींद की समस्याएं पैदा कर सकता है।


क्या आप दवाओं के आदी हैं?

दवाओं की लत


यदि आप हर छोटी-मोटी समस्या पर दवा लेते हैं, तो यह आपकी आदत बन सकती है। जरूरत से ज्यादा दवा लेना आपके जीवन के अन्य पहलुओं को प्रभावित कर सकता है।


समाधान और सुझाव

स्वास्थ्य के लिए उपाय


छोटी बीमारियों के लिए दवा लेने से बचें और किसी विशेषज्ञ से सलाह लें। अपने जीवनशैली में बदलाव करें, स्वस्थ आहार लें, नियमित व्यायाम करें, और ध्यान एवं योग का अभ्यास करें। आयुर्वेदिक नुस्खों का उपयोग करें और समूह चिकित्सा का सहारा लें।