नींद की कमी और प्रजनन क्षमता: एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या
नींद की कमी और प्रजनन क्षमता:
आधुनिक जीवनशैली में देर रात तक जागना और सुबह जल्दी उठना अब एक सामान्य आदत बन गई है। चंडीगढ़, पंचकुला और मोहाली जैसे क्षेत्रों में युवाओं के बीच कम सोने की यह प्रवृत्ति अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले रही है। चंडीगढ़ की बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ की विशेषज्ञ डॉ. राखी गोयल ने इस विषय पर कुछ चौंकाने वाले वैज्ञानिक तथ्य साझा किए हैं। उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति रोज़ केवल 5 घंटे सोता है, तो यह सामान्य लग सकता है, लेकिन यह प्रजनन क्षमता पर गंभीर प्रभाव डालता है। जो नींद लोग करियर के तनाव या मनोरंजन के कारण छोड़ रहे हैं, वही भविष्य में माता-पिता बनने की उनकी संभावनाओं में बाधा डाल सकती है।
फर्टिलिटी हार्मोन और नींद का संबंध
रात का समय केवल थकान मिटाने के लिए नहीं होता, बल्कि इस दौरान शरीर हार्मोन का संतुलन भी बनाता है। महिलाओं में अंडोत्सर्जन और भ्रूण का गर्भाशय में ठहरना फर्टिलिटी हार्मोन पर निर्भर करता है। जब महिलाएं नियमित रूप से कम नींद लेती हैं, तो ये हार्मोन सही तरीके से काम करना बंद कर देते हैं। प्रोजेस्टेरोन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन का स्तर गिरने से ओव्यूलेशन प्रभावित होता है। यह समस्या धीरे-धीरे विकसित होती है और प्रारंभिक जांच में भी इसका पता नहीं चलता।
पुरुषों पर नींद की कमी का प्रभाव
फर्टिलिटी की चर्चा में अक्सर पुरुषों की जीवनशैली को नजरअंदाज किया जाता है। डॉ. राखी गोयल ने बताया कि पुरुषों की नींद का उनकी प्रजनन क्षमता पर गहरा असर पड़ता है। हालिया शोध से पता चलता है कि जो पुरुष रोजाना 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें गर्भधारण की संभावना उन पुरुषों की तुलना में कम होती है जो 7 से 8 घंटे सोते हैं। टेस्टोस्टेरोन, जो मुख्य प्रजनन हार्मोन है, गहरी नींद के दौरान बनता है। नींद की कमी से न केवल हार्मोन का स्तर गिरता है, बल्कि शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
फर्टिलिटी में सुधार के लिए सरल उपाय
जब शरीर को पर्याप्त नींद नहीं मिलती, तो मस्तिष्क इसे आपातकालीन स्थिति मानता है और तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ा देता है। लंबे समय तक उच्च कॉर्टिसोल स्तर से प्रजनन हार्मोन प्रभावित होते हैं। यह स्थिति व्यक्ति को सामान्य महसूस करवा सकती है, लेकिन समस्या अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है। अच्छी बात यह है कि इस समस्या का समाधान बिना किसी अतिरिक्त खर्च के किया जा सकता है। डॉ. राखी गोयल के अनुसार, वीकेंड पर ज्यादा सोने के बजाय, रोज़ एक निश्चित समय पर सोने की आदत डालनी चाहिए ताकि शरीर की प्राकृतिक लय बहाल हो सके।
स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य जानकारी
Heatwave Precautions: अचानक पसीना आना बंद होना है बेहद खतरनाक, जानें हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेत
Fathers Day 2026: पापा को हेल्दी रखने के लिए आज ही बदलें उनका लाइफस्टाइल, डॉक्टरों ने दी ये खास सलाह
