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नींद न आने की समस्या: जानें इसके कारण और समाधान

आजकल नींद न आने की समस्या एक आम चुनौती बन गई है। स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया के कारणों में डिजिटल उपकरणों का उपयोग, चिंताएं और कैफीन का सेवन शामिल हैं। इस लेख में जानें कि कैसे आप अपनी नींद की गुणवत्ता को सुधार सकते हैं और बेहतर नींद के लिए क्या उपाय कर सकते हैं।
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नींद न आने की समस्या: जानें इसके कारण और समाधान

नींद की कमी और इसके प्रभाव

नई दिल्ली: आजकल कई लोगों के लिए रात में अच्छी नींद लेना एक कठिनाई बन गया है। कई बार बिस्तर पर लेटने के बावजूद नींद नहीं आती, जिसे चिकित्सा में स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया कहा जाता है। यह केवल एक सामान्य समस्या नहीं है, बल्कि यह आपके दिन की ऊर्जा, मूड और स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। नींद की कमी से मस्तिष्क और शरीर दोनों थक जाते हैं, जिससे तनाव, चिड़चिड़ापन और ध्यान में कमी जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।


डिजिटल उपकरणों का प्रभाव

आजकल मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। सोने से पहले इन उपकरणों का उपयोग करने से शरीर में नींद के हार्मोन मेलाटोनिन का उत्पादन बाधित होता है। आयुर्वेद के अनुसार, इसे मानसिक अशांति और प्रकाश से उत्पन्न विकार माना जाता है। जब स्क्रीन की नीली रोशनी आंखों पर पड़ती है, तो मस्तिष्क यह सोचता है कि दिन खत्म नहीं हुआ है। इसके परिणामस्वरूप, शरीर बिस्तर पर होते हुए भी आराम नहीं कर पाता और नींद नहीं आती।


चिंताओं का प्रभाव

बिस्तर पर जाते ही कई लोग दिनभर की घटनाओं या भविष्य की चिंताओं में उलझ जाते हैं। आयुर्वेद इसे चित्त विकार कहते हैं। जब मस्तिष्क लगातार सक्रिय रहता है, तो शरीर को नींद की आवश्यकता होने पर भी आराम नहीं मिलता। यह सोचने की आदत कई बार अनजाने में बन जाती है, जिससे नींद न आने की समस्या उत्पन्न होती है।


कैफीन का सेवन

कैफीन का सेवन, विशेषकर दोपहर के बाद चाय या कॉफी पीने से भी नींद में बाधा आती है। वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, कैफीन का प्रभाव शरीर में 6 से 8 घंटे तक रहता है। इसका मतलब है कि यदि आप शाम को चाय पीते हैं, तो रात में बिस्तर पर जाने पर आपका मस्तिष्क सक्रिय रहता है और नींद नहीं आती। आयुर्वेद में इसे पित्त और वात के असंतुलन से जोड़ा जाता है, जो शरीर को उत्तेजित रखता है।


अनियमित सोने का समय

स्लीप ऑनसेट इंसोमनिया का एक अन्य कारण अनियमित सोने और जागने का समय है। जब हम रोज अलग-अलग समय पर सोते और जागते हैं, तो हमारा शरीर यह संकेत नहीं देता कि कब सोना है और कब जागना है। आयुर्वेद में इसे शरीर की प्राकृतिक लय के विघटन के रूप में देखा जाता है, जिससे नींद आने में देरी होती है और नींद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।


नींद की समस्या के समाधान

नींद की समस्या को दूर करने के लिए कुछ सरल उपाय हैं। सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का उपयोग कम करें और कमरे को अंधेरा रखें। हल्का संगीत सुनना, गहरी सांस लेना या आयुर्वेदिक हर्ब्स जैसे अश्वगंधा और ब्राह्मी का सेवन मानसिक शांति में मदद कर सकता है। दोपहर के बाद कैफीन से बचें और रोजाना एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें। आयुर्वेद के अनुसार, यह वात और पित्त को संतुलित करके नींद को प्राकृतिक रूप से सुधारता है।