Newzfatafatlogo

पश्चिम एशिया संकट: वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ता जा रहा है

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के चलते कच्चे तेल की आपूर्ति में कमी आई है, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ गया है। आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट आ सकती है। इस बीच, अमेरिका को आर्थिक नुकसान हो रहा है, जबकि चीन और रूस इस संकट से लाभ उठा रहे हैं। जानें इस संकट के विभिन्न पहलुओं के बारे में।
 | 
पश्चिम एशिया संकट: वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ता जा रहा है

संघर्ष की लंबी अवधि से वैश्विक मंदी की आशंका


संघर्ष की लंबी अवधि से वैश्विक मंदी का खतरा


28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की शुरुआत के बाद से स्थिति गंभीर बनी हुई है। इस संघर्ष को दो महीने से अधिक हो चुके हैं, और न तो ईरान ने हार मानी है और न ही अमेरिका ने जीत हासिल की है। वर्तमान में, दोनों देश एक-दूसरे पर हमले नहीं कर रहे हैं, लेकिन स्थिति अभी भी नाजुक है।


ईरान के हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण कच्चे तेल के उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गोरिन्शास ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष जारी रहता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर लगभग 2% तक गिर सकती है, जिसे आमतौर पर वैश्विक मंदी माना जाता है।


उन्होंने यह भी बताया कि युद्ध से पहले वैश्विक महंगाई दर 4.1% से घटकर 3.8% होने की उम्मीद थी, लेकिन अब यह 4.4% तक पहुंचने का अनुमान है।


अमेरिका को युद्ध से आर्थिक नुकसान

हार्वर्ड की अर्थशास्त्री लिंडा बिल्म्स के अनुसार, अमेरिका ने इस युद्ध पर लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर (95 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए हैं, जबकि अमेरिकी सरकार ने केवल 25 अरब डॉलर खर्च करने की बात कही है। युद्ध के कारण अमेरिका को आर्थिक मोर्चे पर भी नुकसान उठाना पड़ा है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिससे लोग ट्रंप प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं।


चीन और रूस को युद्ध से लाभ

इस संघर्ष में अमेरिका को नुकसान उठाना पड़ा है, जबकि चीन और रूस को फायदा हो रहा है। चीन इस स्थिति में अपेक्षाकृत मजबूत नजर आ रहा है, क्योंकि उसने पहले से ही तेल के भंडार जमा कर रखे थे और वैकल्पिक ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित किया था। अमेरिका की छवि कमजोर होने से चीन को कूटनीतिक लाभ भी मिला है।


चीन की तेल और गैस कंपनियां भी इस युद्ध से लाभ कमा रही हैं, और अनुमान है कि छह बड़ी कंपनियां इस वर्ष 94 अरब डॉलर तक का मुनाफा कमा सकती हैं। इसके अलावा, रूस की अर्थव्यवस्था को भी इस संघर्ष से फायदा हो रहा है, क्योंकि तेल और खाद की ऊंची कीमतों के कारण उसकी कमाई बढ़ी है।