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पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता: ऐतिहासिक बैठक की तैयारी

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच पहली बार सीधी वार्ता होने जा रही है। यह वार्ता दो हफ्ते के सीजफायर को स्थायी युद्धविराम में बदलने के लिए आयोजित की जा रही है। उप राष्ट्रपति जेडी वेंस की मौजूदगी में होने वाली इस वार्ता में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। जानें इस ऐतिहासिक बैठक की तैयारी और सुरक्षा उपायों के बारे में।
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पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता: ऐतिहासिक बैठक की तैयारी

अमेरिका और ईरान के बीच सीधी वार्ता

नई दिल्ली। पूरी दुनिया की निगाहें पाकिस्तान पर टिकी हुई हैं। इस्लामाबाद में शनिवार को अमेरिका और ईरान के बीच पहली बार सीधी बातचीत होने जा रही है। यह वार्ता दो हफ्ते के सीजफायर को स्थायी युद्धविराम में बदलने के उद्देश्य से होगी, जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख भी शामिल होंगे। इससे पहले, ओमान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच परोक्ष वार्ता हो चुकी है। इस बार की वार्ता में अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस भी भाग लेंगे। हालांकि, शुक्रवार की शाम तक ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान नहीं पहुंचा था।


उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान के लिए रवाना होने से पहले कहा कि ईरान को ईमानदारी से बातचीत करनी चाहिए और कोई चालाकी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि तेहरान सद्भावना से बात करेगा, तो अमेरिका भी खुलकर बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन यदि ईरान ने चालाकी की, तो अमेरिकी टीम सख्त रुख अपनाएगी। वेंस ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं।


वेंस के पाकिस्तान पहुंचने से पहले, नूर खां एयरबेस पर पाकिस्तान की एक कार्गो जहाज पहुंचा। वॉशिंगटन डीसी में पत्रकारों से बातचीत में वेंस ने कहा कि बातचीत राष्ट्रपति ट्रंप के दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि बातचीत सही दिशा में हुई, तो इसके सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक से पहले इस्लामाबाद को सुरक्षा के लिहाज से अभेद किला बना दिया गया है। इस अवसर को ऐतिहासिक बनाने के लिए पाकिस्तान में दो दिन की छुट्टी भी घोषित की गई है।


हालांकि, उप राष्ट्रपति वेंस के रवाना होने के बाद तक ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बताया जा रहा है कि इजराइल के लेबनान पर हमले के कारण ईरान ने बातचीत में सख्त रुख अपनाया है। पहले खबर आई थी कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच चुका है, लेकिन ईरानी मीडिया ने इसे खारिज कर दिया। उल्लेखनीय है कि आठ अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बनी थी।


इस सीजफायर को स्थायी बनाने के लिए अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह से बंद करे और अपना संवर्धित यूरेनियम परमाणु ऊर्जा एजेंसी को सौंप दे। लेकिन ईरान इसके लिए तैयार नहीं है। ईरान होर्मुज की खाड़ी पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, जबकि अमेरिका इसके लिए सहमत नहीं है। अमेरिका ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों पर रोक लगाना चाहता है, लेकिन ईरान इसके लिए भी तैयार नहीं है। दूसरी ओर, ईरान पाबंदियां हटवाना चाहता है, फ्रीज की गई संपत्ति वापस चाहता है, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा चाहता है, अपने सभी प्रॉक्सी संगठनों पर हमले बंद कराना चाहता है और खाड़ी से अमेरिकी सैनिकों की वापसी चाहता है। अमेरिका इनमें से किसी भी मांग पर राजी नहीं होगा।