पाकिस्तान रेलवे की नई रियायत नीति से यात्रियों पर पड़ेगा असर
नई रियायत नीति का प्रभाव
नई दिल्ली। पाकिस्तान रेलवे ने अपनी रियायत नीति में एक नया और विवादास्पद बदलाव किया है, जिसका प्रभाव देशभर में हजारों यात्रियों पर पड़ेगा। इस नए नियम के तहत किराए में मिलने वाली छूट को काफी हद तक सीमित कर दिया गया है, जिससे यात्रा की लागत में वृद्धि की आशंका बढ़ गई है। समाचार चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे अधिकारी इन परिवर्तनों को रियायतों के उपयोग को नियंत्रित करने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। नई नीति के अनुसार, सभी रियायतों पर 50 प्रतिशत की एक सख्त ऊपरी सीमा लागू की गई है, जिसका अर्थ है कि यात्री अब टिकट की कीमत का आधा से अधिक छूट नहीं ले सकेंगे। यह पहले के नियमों से बिल्कुल भिन्न है, जहां कुछ विशेष श्रेणियों में अधिक उदार छूट दी जाती थी।
पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि इस सीमा से एकरूपता आएगी, लेकिन कई यात्रियों के लिए यह यात्रा को महंगा बना सकती है। एक और महत्वपूर्ण बदलाव में, योग्य यात्रियों को अब हर साल केवल 10 रियायती एकतरफ़ा यात्राओं तक सीमित कर दिया गया है। इस सीमा का उद्देश्य लाभों का नियंत्रित वितरण सुनिश्चित करना है, लेकिन यह उन यात्रियों के लिए कठिनाई पैदा कर सकता है जो अपनी आवश्यक यात्राओं के लिए इन छूटों पर निर्भर हैं। यह नई नीति सभी ट्रेनों और श्रेणियों पर लागू होगी, जिससे पूरे रेलवे नेटवर्क में इसका समान पालन सुनिश्चित होगा। हालांकि, कई प्रीमियम और निजी सेवाएं इस रियायत योजना से बाहर रहेंगी। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीन लाइन, पाक बिज़नेस, शाह हुसैन एक्सप्रेस और अन्य आउटसोर्स सेवाएं अब रियायती किराया नहीं देंगी, जिससे उच्च श्रेणी की यात्रा के विकल्पों पर छूट की पहुंच कम हो जाएगी। सबसे विवादास्पद बदलाव यह है कि पहले जीवनसाथी को दी जाने वाली 50 प्रतिशत की छूट को तुरंत समाप्त कर दिया गया है, जो यात्रियों की आवश्यकताओं के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
