पीरियड्स के दौरान खाने की इच्छाएं: जानें इसके पीछे के कारण और समाधान
पीरियड्स के समय खाने की इच्छाओं का रहस्य
नई दिल्ली: पीरियड्स के पहले या दौरान चॉकलेट, कुरकुरे चिप्स या मीठे खाने की इच्छा होना एक सामान्य बात है। इसे अक्सर मूड स्विंग के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण होते हैं। दरअसल, यह खाने की इच्छा हॉर्मोनल बदलावों से जुड़ी होती है।
हॉर्मोनल परिवर्तन
पीरियड्स के पहले के चरण में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन का स्तर तेजी से बदलता है। इन हॉर्मोनल परिवर्तनों के कारण मस्तिष्क में सेरोटोनिन की कमी हो जाती है, जो मूड को नियंत्रित करता है। जब सेरोटोनिन की कमी होती है, तो दिमाग कार्बोहाइड्रेट और शुगर से भरपूर खाद्य पदार्थों की मांग करने लगता है, जिससे महिलाओं को राहत मिलती है।
विभिन्न प्रकार की खाने की इच्छाएं
चॉकलेट की इच्छा
पीरियड्स के दौरान चॉकलेट खाने की इच्छा सबसे सामान्य होती है। चॉकलेट में मैग्नीशियम होता है, जो मांसपेशियों को आराम देने और मूड को स्थिर रखने में मदद करता है।
नमकीन और कुरकुरे चिप्स की इच्छा
अचार या नमकीन स्नैक्स की इच्छा प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन के कारण होती है, जो शरीर में पानी जमा होने और ब्लोटिंग का कारण बनता है।
मीठा, पास्ता या ब्रेड की इच्छा
रिफाइंड कार्ब्स और चीनी वाले खाद्य पदार्थ शुगर को तुरंत बढ़ाते हैं, जिससे शरीर की सुस्ती और थकान कुछ समय के लिए दूर हो जाती है।
रेड मीट या भारी भोजन की इच्छा
जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग होती है, उन्हें अक्सर बर्गर या रेड मीट खाने की इच्छा होती है, जो शरीर में आयरन की कमी का संकेत है।
इन इच्छाओं को शांत करने के उपाय
चीनी या मैदा के स्थान पर आप ओट्स, साबुत अनाज, मीठे फल या शकरकंद का सेवन कर सकते हैं। प्रोसेस्ड नमकीन की जगह भुने हुए नट्स, कद्दू या अलसी के बीज, मखाने का विकल्प चुनें। आयरन की कमी को पूरा करने के लिए पालक, चुकंदर, दालें, खजूर और अनार का सेवन करें।
आराम पाने के लिए सरल टिप्स
कई बार शरीर प्यास के संकेतों को भूख समझ लेता है, इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। कम नींद लेने से भूख बढ़ाने वाले हॉर्मोन सक्रिय हो जाते हैं, जो आपको जंक फूड खाने पर मजबूर करते हैं। भोजन छोड़ने से ब्लड शुगर अनियंत्रित हो सकता है। समय पर पौष्टिक भोजन लें ताकि अचानक भूख न लगे। नियमित शारीरिक गतिविधि से शरीर में एंडोर्फिन हॉर्मोन रिलीज होता है, जो मूड को बेहतर बनाता है और तनाव जनित क्रेविंग को रोकता है।
