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पैरों में सूजन: दिल की सेहत का संकेत

पैरों में सूजन अक्सर थकान या लंबे समय तक खड़े रहने का नतीजा समझा जाता है, लेकिन यह दिल की सेहत का गंभीर संकेत हो सकता है। यदि सूजन शाम को बढ़ती है और दबाने पर गड्ढा बनता है, तो यह हार्ट फेलियर का संकेत हो सकता है। जानें इसके कारण, लक्षण और रोकथाम के उपाय, ताकि आप समय पर सही कदम उठा सकें और अपनी सेहत को बेहतर बना सकें।
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पैरों में सूजन: दिल की सेहत का संकेत

पैरों में सूजन का महत्व


नई दिल्ली: आजकल की तेज़ रफ्तार जिंदगी में हम अक्सर छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं। पैरों में सूजन को कई लोग थकान या लंबे समय तक खड़े रहने का परिणाम मानते हैं। लेकिन यदि यह सूजन शाम को बढ़ती है और दबाने पर गड्ढा बनता है, तो यह दिल की सेहत के लिए एक चेतावनी हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट फेलियर की स्थिति में दिल रक्त को सही तरीके से पंप नहीं कर पाता, जिससे तरल पदार्थ पैरों में जमा हो जाता है। यह एक प्रारंभिक संकेत है, जिसे पहचानकर समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है.


पिटिंग एडिमा: कारण और प्रभाव

पिटिंग एडिमा तब होती है जब सूजे हुए क्षेत्र पर उंगली दबाने से गड्ढा बनता है, जो कुछ समय तक बना रहता है। यह मुख्यतः तब होता है जब दिल का दाहिना हिस्सा कमजोर हो जाता है। रक्त सही तरीके से वापस नहीं लौट पाता, नसों में दबाव बढ़ता है और तरल पदार्थ ऊतकों में रिसने लगता है। यह समस्या विशेष रूप से टखनों और पैरों में अधिक दिखाई देती है। यदि यह रोजाना हो रही है, तो यह कंजेस्टिव हार्ट फेलियर का एक प्रमुख संकेत माना जाता है.


दिल से संबंधित प्रमुख कारण

हार्ट फेलियर सबसे सामान्य कारण है, लेकिन वाल्वुलर हार्ट डिजीज में वाल्व का सही से काम न करना भी रक्त प्रवाह में बाधा डालता है। पल्मोनरी हाइपरटेंशन में दाहिने दिल पर दबाव पड़ता है, जिससे सूजन बढ़ती है। गर्भावस्था के दौरान पेरिपार्टम कार्डियोमायोपैथी में भी पैरों में सूजन हो सकती है। डीप वेन थ्रोम्बोसिस जैसी स्थितियों में थक्के बनने से अचानक सूजन हो सकती है। कुछ रक्तचाप की दवाएं, जैसे कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, भी एडिमा को बढ़ा सकती हैं.


सूजन के साथ अन्य लक्षण

सूजन के साथ-साथ कई बार सांस फूलना, थकान और व्यायाम करने में कठिनाई जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। सूजन वाले क्षेत्र की त्वचा चमकदार और खिंची हुई लगती है, और छूने पर गर्म महसूस होती है। अचानक 1-2 किलो वजन बढ़ना भी तरल पदार्थ के रिटेंशन का संकेत है। शाम के समय सूजन अधिक बढ़ जाती है, क्योंकि दिनभर खड़े या बैठे रहने से गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव पड़ता है। ये सभी लक्षण दिल की कमजोरी की ओर इशारा करते हैं.


बचाव और रोकथाम के उपाय

नमक का सेवन कम करें और पैकेज्ड फूड से बचें। रोजाना हल्की सैर या योग से रक्त संचार में सुधार होता है। रक्तचाप और शुगर को नियंत्रित रखें, क्योंकि ये हार्ट फेलियर को बढ़ावा देते हैं। नियमित हार्ट चेकअप करवाएं, खासकर यदि परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास हो। पैरों को ऊंचा करके बैठें और लंबे समय तक खड़े न रहें। ये छोटे बदलाव दिल की सेहत को मजबूत बना सकते हैं और सूजन को कम कर सकते हैं.


कब डॉक्टर से संपर्क करें?

पैरों में सूजन को कभी भी हल्के में न लें, विशेषकर यदि यह दोनों तरफ हो और लंबे समय से बनी रहे। यदि इसके साथ सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई या अत्यधिक थकान हो, तो तुरंत जांच कराएं। डॉक्टर इकोकार्डियोग्राफी या अन्य परीक्षणों के माध्यम से कारण का पता लगाते हैं। प्रारंभिक चरण में पहचानने से उपचार आसान होता है और गंभीर अटैक से बचा जा सकता है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें, क्योंकि छोटे संकेत बड़े खतरों को टाल सकते हैं.