प्याज और लहसुन का व्रत में न होना: वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण

प्याज और लहसुन का व्रत में निषेध
आपने शायद अपने परिवार के सदस्यों से सुना होगा कि पूजा या व्रत के दौरान प्याज और लहसुन का सेवन नहीं किया जाता। क्या आपने कभी सोचा है कि ये सामान्य सामग्री, जो खाने का स्वाद बढ़ाती हैं, पूजा के भोग से क्यों हटा दी जाती हैं? इसके पीछे केवल परंपरा नहीं, बल्कि गहरे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण भी हैं।भारतीय शास्त्रों और आयुर्वेद के अनुसार, भोजन को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: सात्विक, राजसिक और तामसिक।
सात्विक भोजन: इसे सबसे शुद्ध माना जाता है, जिसमें फल, सब्जियाँ, दूध, घी और मेवे शामिल हैं। यह मन को शांति और पवित्रता प्रदान करता है।
राजसिक भोजन: यह तला हुआ, मसालेदार और चटपटा होता है, जो शरीर में बेचैनी और तनाव को बढ़ाता है।
तामसिक भोजन: इसमें बासी और दुर्गंधयुक्त खाद्य पदार्थ आते हैं, जैसे प्याज और लहसुन। ये आलस्य, क्रोध और अज्ञानता को बढ़ाते हैं।
जब हम पूजा या व्रत करते हैं, तो हमारा उद्देश्य मन को शांत करना और भगवान के निकट जाना होता है। प्याज और लहसुन जैसे तामसिक खाद्य पदार्थ ध्यान को भंग कर सकते हैं, इसलिए इन्हें व्रत के दौरान नहीं खाना चाहिए।
इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। समुद्र मंथन के समय, जब अमृत निकला, तो भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया और देवताओं को अमृत पिलाया। राहु और केतु ने धोखे से अमृत पी लिया, जिसके परिणामस्वरूप भगवान ने उन्हें दंडित किया। उनके कटे सिर से जो रक्त की बूँदें गिरीं, उसी से प्याज और लहसुन की उत्पत्ति हुई।
इसलिए, अगली बार जब कोई आपसे पूछे कि प्याज और लहसुन का सेवन क्यों नहीं किया जाता, तो आप उन्हें बता सकते हैं कि यह केवल एक अंधविश्वास नहीं है, बल्कि मन को साधने और भक्ति में लीन होने का एक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तरीका है।