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प्रतीक यादव का निधन: पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण जानें इसके लक्षण और बचाव

प्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे, का निधन 38 वर्ष की आयु में पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण हुआ। इस स्थिति में फेफड़ों की धमनियों में खून के थक्के जम जाते हैं, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं। जानें इसके लक्षण, कारण और इससे बचाव के उपाय। यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
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प्रतीक यादव का निधन: पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण जानें इसके लक्षण और बचाव

प्रतीक यादव का निधन


मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव, जो अखिलेश यादव के सौतेले भाई थे, का 38 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पल्मोनरी एम्बोलिज्म को मुख्य कारण बताया गया है, जिसमें फेफड़ों की धमनियों में खून के थक्के जम गए थे, जिससे कार्डियो-रेस्पिरेटरी कोलैप्स हुआ। प्रतीक यादव हाल ही में फेफड़ों की समस्या और ब्लड क्लॉट के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थे।


पल्मोनरी एम्बोलिज्म की जानकारी

पल्मोनरी एम्बोलिज्म एक गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर के अन्य हिस्सों की गहरी नसों में बने खून के थक्के (डीप वेन थ्रोम्बोसिस - DVT) टूटकर फेफड़ों की धमनियों में फंस जाते हैं। इससे रक्त का प्रवाह रुक जाता है, ऑक्सीजन की कमी होती है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।


खून के थक्के बनने के कारण

डॉक्टर्स के अनुसार थक्का बनने के तीन मुख्य कारण होते हैं:


1. रक्त का बहाव धीमा होना: लंबे समय तक बिस्तर पर रहना, लंबी यात्रा या अधिक समय तक बैठे रहना।


2. रक्त वाहिकाओं को नुकसान: सर्जरी, चोट या बीमारी से नसों की दीवार क्षतिग्रस्त होना।


3. रक्त का गाढ़ा होना: जेनेटिक बीमारियां, हार्मोनल दवाएं, कैंसर, मोटापा, धूम्रपान या लंबी बीमारी।


अन्य जोखिम कारक

मोटापा


हाई ब्लड प्रेशर


डायबिटीज


पिछले थक्के का इतिहास


हाल की सर्जरी या फ्रैक्चर


लंबे समय तक गतिहीनता


लक्षण

अचानक सांस फूलना


सीने में तेज दर्द (खासकर सांस लेते समय)


तेज धड़कन


खांसी में खून आना


चक्कर आना या बेहोशी


पैरों में सूजन या दर्द (अगर DVT हो)


प्रतीक यादव को भी सांस की तकलीफ थी और वे इलाज करा रहे थे, लेकिन उनकी स्थिति अचानक बिगड़ गई।


बचाव के उपाय

ज्यादा देर तक न बैठें, हर घंटे थोड़ी देर टहलें।


लंबी यात्रा में खूब पानी पिएं और पैर हिलाते रहें।


स्वस्थ वजन बनाए रखें।


धूम्रपान छोड़ें।


डॉक्टर की सलाह पर ब्लड थिनर दवाएं लें (अगर जोखिम हो)।


संदेह होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।