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प्रेग्नेंसी में केसर के सेवन के लाभ: जानें कैसे करें इसका उपयोग

प्रेग्नेंसी के दौरान केसर का सेवन करने से कई स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं। यह न केवल बच्चे की सुंदरता में योगदान कर सकता है, बल्कि पाचन क्षमता, मूड, और नींद में भी सुधार कर सकता है। जानें कैसे करें केसर का सही उपयोग और इसके फायदे।
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प्रेग्नेंसी में केसर के सेवन के लाभ: जानें कैसे करें इसका उपयोग

प्रेग्नेंसी में केसर का महत्व

यह माना जाता है कि प्रेग्नेंसी के दौरान केसर का सेवन करने से बच्चे की त्वचा का रंग बेहतर हो सकता है। कई लोग इस धारणा के चलते केसर का उपयोग करते हैं, यह सोचकर कि इससे बच्चे की सुंदरता बढ़ेगी। लेकिन क्या यह सच है? केसर में कई पोषक तत्व होते हैं, और इसे प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में शामिल करने से कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। इस लेख में, हम जानेंगे कि इस समय केसर का सेवन करने से क्या फायदे होते हैं।


प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में केसर का सेवन कैसे करें?

- सबसे पहले, 2-3 केसर के धागों को एक गिलास दूध में अच्छे से उबालें।


- सोने से पहले इस दूध का सेवन करें।


- आप चाहें तो केसर के धागों को गुनगुने पानी में मिलाकर भी पी सकती हैं।


- यदि आप रोजाना केसर का सेवन करना चाहती हैं, तो 2-3 धागे पर्याप्त हैं।


प्रेग्नेंसी में केसर के सेवन के फायदे

पाचन क्षमता में सुधार: प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में केसर का सेवन पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है। इस समय गर्भ में बच्चे का वजन बढ़ता है, जिससे पेट और आस-पास के अंगों पर दबाव पड़ता है। इससे कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं हो सकती हैं। नियमित रूप से केसर का सेवन करने से पेट की सूजन और एसिडिटी में कमी आ सकती है।


मूड में सुधार: प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं का मूड अक्सर बदलता रहता है। कभी-कभी वे चिंता या अवसाद का अनुभव करती हैं। केसर का सेवन मूड को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, क्योंकि यह सेरोटोनिन हार्मोन के स्तर को बढ़ाता है।


मॉर्निंग सिकनेस में कमी: प्रेग्नेंसी की शुरुआत में कई महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस का सामना करना पड़ता है। केसर को आहार में शामिल करने से मतली की तीव्रता कम हो सकती है और मॉर्निंग सिकनेस से राहत मिल सकती है।


बेहतर नींद: प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही में महिलाओं को अच्छी नींद लेना मुश्किल हो सकता है। केसर का सेवन नींद को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, जो गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के लिए फायदेमंद है।