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फोन की परफॉर्मेंस बढ़ाने के लिए बैकग्राउंड एप्स को क्लोज करने की सही विधि

क्या आप सोचते हैं कि बैकग्राउंड एप्स को बार-बार क्लोज करने से आपके फोन की स्पीड बढ़ती है? विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमेशा सही नहीं होता। जानें कि फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम बैकग्राउंड एप्स को कैसे मैनेज करता है और कब एप्स को क्लोज करना चाहिए। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि बैटरी की खपत को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है और फोन की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए क्या करना चाहिए।
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फोन की परफॉर्मेंस बढ़ाने के लिए बैकग्राउंड एप्स को क्लोज करने की सही विधि

क्या बैकग्राउंड एप्स को क्लोज करना सही है?

कई लोग मानते हैं कि फोन में चल रहे सभी बैकग्राउंड एप्स को बार-बार क्लियर करने से डिवाइस की स्पीड बढ़ जाती है और परफॉर्मेंस में सुधार होता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार बैकग्राउंड एप्स को हटाने से कभी-कभी फोन की स्पीड में कमी आ सकती है।


फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम बैकग्राउंड एप्स को मैनेज कर सकता है

चाहे आपका फोन एंड्रायड हो या iOS, इसका ऑपरेटिंग सिस्टम इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह एप्स को बैकग्राउंड में खुद ही मैनेज कर सकता है। जब आप किसी एप का उपयोग बंद करते हैं, तो वह पूरी तरह से बंद नहीं होता, बल्कि सस्पेंड मोड में चला जाता है। इस स्थिति में, वह बहुत कम RAM और बैटरी का उपयोग करता है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उसे तुरंत खोला जा सके।


बैटरी की खपत बढ़ सकती है

यदि आप बार-बार एप स्विचर में जाकर सभी एप्स को बंद कर देते हैं, तो अगली बार जब आप उस एप को खोलेंगे, तो फोन को उसे फिर से पूरी तरह से लोड करना पड़ेगा। इससे प्रोसेसर पर अधिक लोड पड़ेगा और कई बार बैटरी की खपत भी बढ़ सकती है। यही कारण है कि बार-बार एप्स को हटाना कभी-कभी फोन की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के बजाय उसे धीमा कर सकता है।


कब क्लोज करें एप्स?

टेक कंपनियां सलाह देती हैं कि केवल उन्हीं एप्स को बंद करें जो सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं या बार-बार फ्रीज हो रहे हैं। अन्य एप्स को बैकग्राउंड में रहने देना बेहतर होता है। डिवाइस का सिस्टम खुद ही RAM को जरूरत के अनुसार मैनेज कर सकता है और जिन एप्स की आवश्यकता नहीं होती, उन्हें अपने आप बंद कर सकता है।