बच्चों में हार्ट अटैक: बढ़ते खतरे और बचाव के उपाय
बच्चों में हृदय संबंधी बीमारियों का बढ़ता खतरा
हाल के दिनों में हृदय रोगों का खतरा युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है। पहले ये समस्याएं आमतौर पर 50 या 60 साल की उम्र में देखी जाती थीं, लेकिन अब कम उम्र के बच्चों को भी हार्ट अटैक का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में दौसा के समलेटी गांव में एक 14 वर्षीय बच्चे की हार्ट अटैक से मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। परिजनों के अनुसार, बच्चा बिस्तर से पानी पीने के लिए उठा और अचानक बेहोश होकर गिर गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
डॉक्टर की राय
महवा अस्पताल की डॉक्टर माधुरी शर्मा ने बताया कि बच्चे की मृत्यु अचानक हार्ट अटैक के कारण हो सकती है। हालांकि, मौत के सही कारणों का पता पोस्टमॉर्टम से ही चल सकता था, लेकिन परिजनों ने इसे कराने से मना कर दिया। हमने इस विषय पर दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल अस्पताल के प्रोफेसर और डॉक्टर आर.के कौशिक से चर्चा की।
क्या बच्चों में हार्ट अटैक संभव है?
डॉक्टर कौशिक के अनुसार, बच्चों में हार्ट अटैक का खतरा बहुत कम होता है। यदि किसी बच्चे की मृत्यु हार्ट अटैक से हुई है, तो संभवतः उसके पास पहले से कोई अनदेखी बीमारी होगी। यदि बच्चे को दौड़ने में सांस चढ़ती है, तो तुरंत चेकअप करवाना आवश्यक है।
यदि कोई बच्चा मोटा है, तो उसे हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन हार्ट अटैक से सीधे मौत का खतरा बहुत कम होता है। बच्चों के खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए और उन्हें जंक फूड से दूर रखना चाहिए।
बचाव के उपाय
- यदि बच्चा अपनी उम्र के अनुसार कम सक्रिय है, तो उसका चेकअप करवाना चाहिए। हो सकता है कि बच्चे के दिल में कोई छोटी समस्या हो, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
- अचानक गिरना या बिना कारण बेहोश होना हार्ट संबंधी बीमारी का संकेत हो सकता है।
- सांस लेने में कठिनाई होना भी एक लक्षण है।
- बच्चों को जंक फूड से दूर रखें।
- बच्चे की शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान दें।
