बरसाने की लट्ठमार होली: परंपरा और महत्व
बरसाने की लट्ठमार होली एक प्राचीन परंपरा है, जो राधा रानी के जन्मस्थान पर मनाई जाती है। इस पर्व का इतिहास और महत्व जानें, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण और उनकी सखियों की मस्ती भरी कहानियां शामिल हैं। हर साल हजारों भक्त इस उत्सव में भाग लेने के लिए आते हैं, जिससे यह केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध हो गया है।
| Mar 4, 2026, 09:40 IST
बरसाने में लट्ठमार होली का उत्सव
होली का त्योहार विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। बरसाने में मनाई जाने वाली लट्ठमार होली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह एक प्राचीन परंपरा का हिस्सा है। मथुरा और वृंदावन में होली का जश्न विशेष रूप से देखने लायक होता है। धुलेंडी से लगभग एक सप्ताह पहले यहां होली की शुरुआत होती है। पहले दिन लड्डूमार होली और दूसरे दिन लट्ठमार होली का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष, 26 फरवरी 2026 को बरसाने में लट्ठमार होली का उत्सव मनाया जाएगा। आइए जानते हैं लट्ठमार होली की उत्पत्ति और इसके महत्व के बारे में।
लट्ठमार होली का इतिहास
बरसाने में लट्ठमार होली का आयोजन राधा रानी के जन्मस्थान पर होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण अपने ग्वालों के साथ गोकुल से बरसाने आते थे। यहां, वह राधा रानी और उनकी सखियों पर रंग डालने का प्रयास करते थे। इस पर राधा रानी और उनकी सखियां श्रीकृष्ण और उनके दोस्तों से नाराज हो जाती थीं।
जब श्रीकृष्ण और उनके साथी रंग डालने से मना करने के बावजूद नहीं माने, तो राधा रानी और उनकी सखियां उनके सखाओं को लट्ठ से मारने लगीं। भगवान कृष्ण और उनके सभी साथी इस मस्तीभरी मार से बचने के लिए इधर-उधर छिपने लगे। तभी से बरसाने में लट्ठमार होली की परंपरा शुरू हुई।
वैश्विक प्रसिद्धि
बरसाना की रंगीन गलियों में लट्ठमार होली का आयोजन होता है, जिसे राधा-कृष्ण स्थली का प्रतीक माना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों से हजारों भक्त यहां होली खेलने के लिए आते हैं। बरसाने की लट्ठमार होली केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी प्रसिद्ध है। विदेशी पर्यटक भी यहां होली के रंग में रंगने के लिए आते हैं। लट्ठमार होली खेलने से एक दिन पहले बरसाने के श्रीजी मंदिर में लड्डूमार होली का आयोजन किया जाता है।
मथुरा-वृंदावन की होली केवल अबीर और गुलाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह धुलंडी से एक सप्ताह पहले शुरू होती है। लट्ठमार होली के अवसर पर लाठी भांजने की प्रतियोगिता भी आयोजित की जाती है।
