भारत में गर्दन के कैंसर के बढ़ते मामले: लक्षण और रोकथाम के उपाय
गर्दन और सिर के कैंसर की बढ़ती समस्या
नई दिल्ली: हाल के वर्षों में भारत में सिर और गर्दन के कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। चिकित्सकों का मानना है कि इस बीमारी के बढ़ने का मुख्य कारण जागरूकता की कमी और प्रारंभिक लक्षणों की अनदेखी करना है। आमतौर पर लोग गर्दन में दर्द को नेक कैंसर का प्रमुख संकेत मानते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर में अन्य कई बदलाव भी इस गंभीर स्थिति का संकेत दे सकते हैं।
नेक कैंसर की पहचान
विशेषज्ञों के अनुसार, नेक कैंसर केवल एक प्रकार की बीमारी नहीं है, बल्कि यह गले, जीभ, मुंह, वोकल कॉर्ड्स, थायरॉइड, लार ग्रंथियों और नाक के विभिन्न हिस्सों में विकसित होने वाले कई प्रकार के कैंसर का समूह है। यदि प्रारंभिक लक्षणों को समय पर पहचाना जाए, तो उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है।
डॉक्टरों की सलाह
चिकित्सकों का कहना है कि लगातार गले में खराश या दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, गर्दन में सूजन या गांठ, आवाज में भारीपन, निगलने में कठिनाई और मुंह में लंबे समय तक घाव बने रहना भी गंभीर संकेत हो सकते हैं। कई लोग इन लक्षणों को सामान्य संक्रमण समझकर अनदेखा कर देते हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
लक्षणों की पहचान
विशेषज्ञों ने बताया कि जीभ या मुंह के अंदर लाल और सफेद धब्बे, बिना किसी कारण खून आना, सांस से बदबू आना और कान में दर्द होना भी नेक कैंसर के संकेत हो सकते हैं। लगातार थकान और अचानक वजन कम होना भी चेतावनी का संकेत है। यदि ये लक्षण दो से तीन हफ्ते तक बने रहें, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
नेक कैंसर के कारण
भारत में तंबाकू और गुटखा का सेवन नेक कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। इसके अलावा, शराब का अत्यधिक सेवन, वायु प्रदूषण, कमजोर इम्यूनिटी और HPV संक्रमण भी इसके जोखिम को बढ़ाते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन भी इस बीमारी के खतरे को बढ़ा सकता है।
पहले यह बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। समय पर बचाव के उपाय अपनाना अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों ने तंबाकू और गुटखा से दूर रहने, शराब का सीमित सेवन करने और संतुलित आहार अपनाने की सलाह दी है।
स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण बातें
चिकित्सकों का कहना है कि रोजाना फल और हरी सब्जियां खाना, नियमित व्यायाम करना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को कम करना शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। ओरल हाइजीन का ध्यान रखना और समय-समय पर मेडिकल जांच करवाना भी आवश्यक है।
