भारत में डिजिटल अरेस्ट घोटालों के खिलाफ बहुस्तरीय कार्रवाई
डिजिटल अरेस्ट घोटालों पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदम
केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया है कि 'डिजिटल अरेस्ट' घोटालों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए एक बहुस्तरीय रणनीति अपनाई गई है। इस प्रक्रिया में दूरसंचार नियामक, सेवा प्रदाता, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), प्रमुख तकनीकी कंपनियां और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) शामिल हैं। व्हाट्सऐप ने ऐसे अपराधों में संलिप्त 9,400 खातों को निलंबित किया है।
सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) ने इस कार्रवाई का विस्तृत विवरण अपनी स्थिति रिपोर्ट में प्रस्तुत किया है। यह रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय के 9 फरवरी के निर्देशों के अनुपालन में प्रस्तुत की गई है।
'डिजिटल अरेस्ट' एक प्रकार का साइबर अपराध है, जिसमें ठग खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों, अदालतों या सरकारी अधिकारियों के रूप में प्रस्तुत करते हैं और पीड़ितों को ऑडियो और वीडियो कॉल के माध्यम से डराते हैं।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में पीठ ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों का स्वत: संज्ञान लेते हुए कई निर्देश जारी किए हैं। इनमें भारतीय रिजर्व बैंक और दूरसंचार विभाग से 'डिजिटल अरेस्ट' मामलों में मुआवजे की व्यवस्था के लिए संयुक्त बैठक करने का निर्देश शामिल है।
व्हाट्सऐप की कार्रवाई और नई सुरक्षा उपाय
अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी द्वारा प्रस्तुत ताजा स्थिति रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वर्ष जनवरी में व्हाट्सऐप ने 'डिजिटल अरेस्ट' घोटालों पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक विशेष जांच शुरू की थी। इस जांच में कई सप्ताह तक कड़ी प्रक्रिया अपनाई गई, जिसमें प्रारंभिक संकेतों की पहचान और नेटवर्क का पता लगाने के लिए कार्रवाई की गई।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि 9,400 व्हाट्सऐप खातों पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा, उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए व्हाट्सऐप कई नए उपाय लागू कर रहा है, जिसमें 'लोगो' पहचानने की प्रणाली शामिल है।
व्हाट्सऐप एक नई सुविधा पर विचार कर रहा है, जिसके तहत उपयोगकर्ताओं को 'नए बनाए गए' या 'कम अवधि से सक्रिय' खातों से कॉल आने पर चेतावनी दी जाएगी।
दूरसंचार विभाग और सेवा प्रदाताओं ने फर्जी सिम कार्डों को निष्क्रिय करने के लिए नई समयसीमा निर्धारित की है। संदिग्ध सिम कार्डों की पहचान होने के बाद उन्हें 'ब्लॉक' करने की प्रक्रिया पर काम चल रहा है।
सीबीआई और अन्य संस्थाओं की भूमिका
सीबीआई ने 'डिजिटल अरेस्ट' मामलों की जांच के लिए 10 करोड़ रुपये के नुकसान की सीमा तय की है। वरिष्ठ अधिकारियों की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय समिति ने 12 मार्च को अपनी तीसरी बैठक की, जिसमें दूरसंचार कंपनियों, वित्तीय नियामकों और डिजिटल प्लेटफार्मों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
रिपोर्ट में एक प्रमुख प्रस्ताव बायोमेट्रिक पहचान सत्यापन प्रणाली (बीआईवीएस) को लागू करने का है, ताकि सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया की सभी नेटवर्क पर निगरानी की जा सके। दूरसंचार विभाग को इस प्रणाली को दिसंबर 2026 तक लागू करने का कार्य सौंपा गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने संदिग्ध लेनदेन पर अस्थायी रोक लगाने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अंतिम रूप दिया है, जिससे फर्जी या मध्यस्थ खातों की गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।
गृह मंत्रालय ने उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया है कि दूरसंचार विभाग को उचित निर्देश जारी किए जाएं, ताकि अंतर-विभागीय समिति द्वारा सुझाए गए कदमों को लागू किया जा सके।
