भारत में दुर्लभ बीमारियों की बढ़ती संख्या: जानें उनके बारे में
दुर्लभ बीमारियों का बढ़ता खतरा
भारत के युवा अब स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं। सही आहार के साथ-साथ योग और व्यायाम का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। फिर भी, विभिन्न बीमारियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। उच्च रक्तचाप, मधुमेह और माइग्रेन के साथ-साथ कई दुर्लभ बीमारियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
पहले कैंसर और हृदय रोग आम नहीं थे, लेकिन अब ये सामान्य हो गए हैं। फिर भी, कुछ ऐसी दुर्लभ बीमारियाँ हैं जिनके बारे में शायद आप नहीं जानते होंगे। दुर्लभ बीमारियाँ वे होती हैं जो बहुत कम लोगों को प्रभावित करती हैं, और इनमें से कई का इलाज भी नहीं मिल पाया है। आइए, जानते हैं इन दुर्लभ बीमारियों के बारे में।
RPI डिफिशिएंसी
यह कमी न केवल भारत में, बल्कि विश्वभर में दुर्लभ मानी जाती है। यह बीमारी शरीर में विशेष एंजाइम की कमी के कारण होती है, जिससे मांसपेशियों में अकड़न और दौरे पड़ने लगते हैं। अब तक इस बीमारी का केवल एक मामला सामने आया है।
फील्ड्स डिजीज
यह एक न्यूरोमस्कुलर बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की मांसपेशियाँ कमजोर होती जाती हैं। अब तक यह बीमारी केवल दो जुड़वा बहनों में देखी गई है।
हचिंसन-गिलफोर्ड प्रोजेरिया सिंड्रोम
यह एक अजीब बीमारी है, जिसमें बच्चे समय से पहले बूढ़े हो जाते हैं। दो से चार साल के बच्चों की त्वचा पर झुर्रियाँ आ जाती हैं और बाल झड़ने लगते हैं, जिससे वे बुजुर्गों की तरह दिखने लगते हैं।
मेथेमोग्लोबिनेमिया
इस बीमारी से प्रभावित लोगों का खून नीले रंग का हो जाता है। शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे त्वचा पीली पड़ जाती है।
एक्वाजेनिक अर्टिकेरिया
इस बीमारी से ग्रस्त लोग पानी के संपर्क में आते ही खुजली से परेशान हो जाते हैं। उन्हें पसीने, बारिश और बर्फ से भी समस्या होती है।
फॉरेन एक्सेंट सिंड्रोम
इस बीमारी में व्यक्ति अपनी मूल भाषा भूलकर एक अलग लहजे में बोलने लगता है। यह समस्या अक्सर मस्तिष्क में गंभीर चोट लगने के बाद होती है।
स्टोन मैन डिजीज
यह एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी है, जिसमें मांसपेशियाँ धीरे-धीरे हड्डियों में बदलने लगती हैं, जिससे शरीर जकड़ जाता है। इससे जीभ और आंखों की मांसपेशियाँ भी प्रभावित होती हैं।
