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भारत में नया स्पेस स्टार्टअप: अगस्थ्य-1 रॉकेट का विकास

भारत स्पेस व्हीकल, एक नई निजी कंपनी, अगस्थ्य-1 नामक दो चरणों वाले रॉकेट का विकास कर रही है, जो छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने में सक्षम होगा। यह रॉकेट तरल ईंधन तकनीक पर आधारित है, जो इसे अन्य रॉकेटों से अलग बनाता है। कंपनी के संस्थापक दल में अनुभवी वैज्ञानिक शामिल हैं, जो पहले के अंतरिक्ष अभियानों में योगदान दे चुके हैं। इसके अलावा, गुजरात में एक नया प्रक्षेपण केंद्र स्थापित करने की योजना है, जो भारत के अंतरिक्ष मिशनों की क्षमता को बढ़ा सकता है।
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भारत में नया स्पेस स्टार्टअप: अगस्थ्य-1 रॉकेट का विकास

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में नई पहल

भारत के अंतरिक्ष उद्योग में एक नया नाम तेजी से उभर रहा है। सूरत स्थित एक निजी कंपनी, भारत स्पेस व्हीकल, अब देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए प्रयासरत है। जानकारी के अनुसार, यह कंपनी 2024 में स्थापित हुई थी और इसके संस्थापक दल में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अनुभवी वैज्ञानिक शामिल हैं, जिनके पास कई वर्षों का अनुभव है।


अगस्थ्य-1 रॉकेट का विकास

कंपनी अगस्थ्य-1 नामक एक दो चरणों वाला रॉकेट विकसित कर रही है, जिसे छोटे उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए तैयार किया जा रहा है। यह रॉकेट तरल ईंधन तकनीक पर आधारित है, जो इसे अन्य छोटे रॉकेटों से अलग बनाता है। तरल ईंधन वाले रॉकेट को प्रक्षेपण से पहले पूरी तरह से जांचा जा सकता है, जिससे जोखिम कम होता है और सफलता की संभावना बढ़ती है।


रॉकेट की क्षमताएँ

यह रॉकेट लगभग 28 मीटर ऊंचा होगा और यह 500 किलोग्राम तक के उपग्रह को ध्रुवीय कक्षा में भेजने में सक्षम होगा। वहीं, कम झुकाव वाली निचली कक्षा में यह 800 किलोग्राम तक का भार ले जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे उपग्रहों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह परियोजना भारत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।


कंपनी की विशेषज्ञता

कंपनी में ऐसे वैज्ञानिक शामिल हैं जिन्होंने पहले देश के महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों में योगदान दिया है। इस टीम में तरल प्रणोदन प्रणाली और प्रक्षेपण यान तकनीक के अनुभवी लोग हैं, जिन्होंने पहले भी बड़े स्तर की परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया है।


नया प्रक्षेपण केंद्र

गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के कोडिनार इलाके में एक नए प्रक्षेपण केंद्र का प्रस्ताव भी सामने आया है। यदि यह योजना आगे बढ़ती है, तो भारत को पश्चिमी तट पर एक नया प्रक्षेपण विकल्प मिल सकता है, जिससे अंतरिक्ष मिशनों की क्षमता में वृद्धि होगी।


निजी कंपनियों के लिए नए अवसर

नई अंतरिक्ष नीति 2023 के बाद, निजी कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में अवसर बढ़ गए हैं और कई स्टार्टअप इस दिशा में काम कर रहे हैं। यह पहल भारत को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में और मजबूत बना सकती है और कम लागत में उपग्रह प्रक्षेपण की दिशा में नई संभावनाएँ खोल सकती है।