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भिवानी में मानसून से फसलों को भारी नुकसान, बाढ़ जैसी स्थिति

भिवानी में इस वर्ष मानसून ने किसानों के लिए गंभीर समस्याएं उत्पन्न की हैं। जलभराव के कारण 36 गांवों में फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। सिंचाई विभाग के अधिकारी लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। जानें इस संकट के बारे में और अधिक जानकारी।
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भिवानी में मानसून से फसलों को भारी नुकसान, बाढ़ जैसी स्थिति

भिवानी में फसल नुकसान की स्थिति

भिवानी फसल नुकसान (Bhiwani): इस वर्ष मानसून ने खरीफ फसल पर गंभीर संकट उत्पन्न कर दिया है। समय से पहले आने वाले मानसून और प्रारंभिक दौर में मिली अच्छी बारिश के कारण किसानों ने 2.27 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 2.46 लाख हेक्टेयर में खरीफ की बुवाई की। जिले के उत्तर पूर्वी क्षेत्र के 36 गांवों में जलभराव के कारण 55,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं।


बाढ़ जैसी स्थिति और स्वास्थ्य समस्याएं

यहां बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। सिंचाई विभाग के 200 अधिकारी और कर्मचारी पिछले दो महीनों से जलभराव को नियंत्रित करने के लिए लगातार 16 घंटे काम कर रहे हैं। रिहायशी क्षेत्रों में बीमारियों का प्रकोप बढ़ने लगा है।


फसलों की जानकारी

कृषि विभाग के डॉ. संजय मैचू के अनुसार, जिले के किसानों ने इस बार 34,192 हेक्टेयर में धान, 6,866 हेक्टेयर में हरा चारा, 82,868 हेक्टेयर में बाजरा और 27,382 हेक्टेयर में मूंग की खेती की है।


दूषित पानी की आपूर्ति

कुछ गांवों में जलभराव के कारण दूषित पेयजल की आपूर्ति हो रही है। चांग, सिवाड़ा, कुंगड़, बवानी खेड़ा, सागवान और बीरण के कई घरों में जलभराव का पानी प्रवेश कर चुका है।


सिंचाई विभाग की प्रयास

एसडीओ सत्यवान अत्री ने बताया कि सिंचाई विभाग के 200 अधिकारी और कर्मचारी 16 घंटे की शिफ्ट में ड्रेनों और नहरों पर काम कर रहे हैं। विभाग ने जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए अस्थाई और स्थाई पंप सेट लगाए हैं।


भविष्य में संभावित नुकसान

जिले की ड्रेनों की क्षमता 20 क्यूसेक से 300 क्यूसेक तक है। लगातार बारिश और जलभराव के कारण ड्रेनों की स्थिति बिगड़ रही है। यदि अगली बारिश होती है, तो यह बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।