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भोपाल एम्स में मेडिकल एडमिशन में धोखाधड़ी का मामला, छात्र गिरफ्तार

भोपाल एम्स में एक युवक ने मेडिकल एडमिशन के लिए धोखाधड़ी की, जिससे उसकी गिरफ्तारी हुई। लवकुश प्रजापति ने अपने दोस्त के अलॉटमेंट लेटर में बदलाव कर खुद को सफल उम्मीदवार दिखाया। यह मामला मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। जानें इस घटना की पूरी कहानी और इसके पीछे की सच्चाई।
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भोपाल एम्स में धोखाधड़ी का खुलासा

भोपाल एम्स में एक युवक द्वारा मेडिकल एडमिशन के लिए की गई धोखाधड़ी ने एक बार फिर से मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 22 वर्षीय युवक, लवकुश प्रजापति, जो कानपुर के किशनपुर गांव का निवासी है, ने डॉक्टर बनने का सपना देखा था, लेकिन चार सालों में नीट परीक्षा में असफलता के बाद उसने गलत रास्ता अपनाया।


लवकुश ने अपने दोस्त का अलॉटमेंट लेटर सोशल मीडिया से प्राप्त कर उसे फोटोशॉप के जरिए बदल दिया। उसने अपने रोल नंबर, अंक और रैंक में फेरबदल कर खुद को नीट में 284वीं रैंक वाला उम्मीदवार दिखाया। इसके साथ ही, उसने दस्तावेज़ में 630 अंक भी दर्ज कर दिए।


24 अगस्त को, लवकुश ने भोपाल में रजिस्ट्रार कार्यालय में अपने एडमिशन दस्तावेज़ जमा किए। प्रारंभ में सब कुछ सामान्य लगा, लेकिन अधिकारियों को संदेह हुआ। जब जानकारी की जांच की गई, तो पता चला कि 284वीं रैंक वाला छात्र पहले ही एम्स भुवनेश्वर में दाखिला ले चुका था।


जैसे ही धोखाधड़ी की पुष्टि हुई, एम्स प्रबंधन ने लवकुश को पुलिस के हवाले कर दिया। बाग सेवनिया थाना पुलिस ने उसके खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है।