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मत्स्यासन: आंखों की थकान और पीठ दर्द से राहत का योगासन

विश्व योग दिवस के नजदीक, भारत सरकार का आयुष मंत्रालय योग के महत्व को बढ़ावा देने के लिए नई जानकारियां साझा कर रहा है। इस बार, मत्स्यासन पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जो आंखों की थकान, गले में खिंचाव और पीठ दर्द जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है। जानें इस आसन के अभ्यास विधि और इसके स्वास्थ्य लाभ।
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मत्स्यासन: आंखों की थकान और पीठ दर्द से राहत का योगासन

विश्व योग दिवस की तैयारी

नई दिल्ली: विश्व योग दिवस नजदीक है, और इस अवसर पर भारत सरकार का आयुष मंत्रालय योग के महत्व को आम जनता तक पहुंचाने के लिए नई जानकारियां साझा कर रहा है। इसी संदर्भ में, मंत्रालय ने मत्स्यासन के लाभों पर प्रकाश डाला है।


शरीर के संकेत

मंत्रालय के अनुसार, यदि आपको आंखों में खिंचाव, गले में परेशानी, या पीठ में अकड़न महसूस हो रही है, तो यह आपके शरीर का संकेत है कि उसे अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता है। आजकल की तेज़-तर्रार जीवनशैली और लगातार स्क्रीन के उपयोग के कारण ये समस्याएं आम हो गई हैं। लंबे समय तक कंप्यूटर, मोबाइल या लैपटॉप पर काम करने वाले व्यक्तियों में आंखों की थकान, गर्दन और गले में जकड़न, और पीठ दर्द की शिकायतें बढ़ रही हैं।


मत्स्यासन का महत्व

योग विशेषज्ञों का कहना है कि इन समस्याओं का समाधान करने के लिए मत्स्यासन एक प्रभावी योगासन है। इसे 'फिश पोज' भी कहा जाता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, छाती को खोलता है, और कंधों व गर्दन के तनाव को कम करता है। नियमित अभ्यास से गर्दन, गले और पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, आंखों की थकान कम होती है, और सांस लेने की क्षमता में सुधार होता है।


स्वास्थ्य लाभ

यह आसन थायरॉइड ग्रंथि को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है। तनाव और चिंता को कम करने के साथ-साथ यह शरीर में ऊर्जा का संचार बढ़ाता है। मंत्रालय का कहना है कि छोटी-छोटी और सचेत आदतें, जैसे रोजाना कुछ मिनट योग का अभ्यास करना, जीवनशैली में बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।


मत्स्यासन का अभ्यास

मत्स्यासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले मैट पर पीठ के बल लेट जाएं। हथेलियों को शरीर के नीचे रखें और कोहनियों को जमीन पर टिकाएं। सांस भरते हुए छाती को ऊपर उठाएं और सिर को पीछे ले जाएं ताकि सिर का ऊपरी हिस्सा जमीन को छू सके। कुछ सेकंड इस स्थिति में रहें और फिर सामान्य स्थिति में लौट आएं। शुरुआत में किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना बेहतर है। गंभीर बीमारियों से ग्रस्त और गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही अभ्यास शुरू करना चाहिए।