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यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रेटर नोएडा में बाढ़ की स्थिति

ग्रेटर नोएडा में यमुना नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है, जिससे बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अवैध फार्म हाउस और खेतों में पानी भरने से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। कई लोग अपने घरों से बेघर होकर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हो गए हैं। हालात गंभीर हैं, खासकर जेवर के चार गांवों में, जहां पानी अब घरों के करीब पहुंच चुका है। जानें इस स्थिति के पीछे क्या कारण हैं और प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी।
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यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रेटर नोएडा में बाढ़ की स्थिति

यमुना नदी का जलस्तर बढ़ता हुआ

Greater Noida News: यमुना नदी का जलस्तर एक बार फिर से बढ़ने लगा है। बुधवार रात से शुरू हुआ यह सिलसिला बृहस्पतिवार सुबह तक तेज हो गया। डूब क्षेत्र में स्थित अवैध फार्म हाउस और खेतों में पानी भर गया है, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं। कई लोग अपने घरों से बेघर होकर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो गए हैं।


फार्म हाउस में पानी भरने की स्थिति

फार्म हाउस डूबे
डूब क्षेत्र में रहने वाले निवासियों ने बताया कि बुधवार रात अचानक पानी खेतों और फार्म हाउसों में प्रवेश करने लगा। कई स्थानों पर 3 से 5 फीट तक पानी भर चुका है। अवैध फार्म हाउसों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ा।


बारिश का प्रभाव

हिमाचल और हरियाणा की बारिश बनी मुसीबत
हथिनीकुंड बैराज से पानी छोड़ने का सिलसिला फिर से शुरू हो गया है। पिछले दो दिनों से 50 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा जा रहा है, जो हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में हुई भारी बारिश के कारण है। जलस्तर बढ़ने से यमुना अपने मुख्य बहाव से बाहर निकल चुकी है, जिससे गौतमबुद्ध नगर, जेवर, रबूपुरा और दनकौर के निचले इलाकों पर असर पड़ा है।


किसानों को नुकसान

किसानों की मेहनत पर पानी फिरा
प्रभावित किसानों का कहना है कि लगभग 400 बीघा क्षेत्र में खड़ी फसल पूरी तरह डूब चुकी है। धान, सब्जी और पशु चारा जैसी महत्वपूर्ण फसलें सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। कानीगढ़ी के किसानों को भी लगभग 250 बीघा फसल के नुकसान का डर सता रहा है।


जेवर के गांवों में बाढ़ का पानी

जेवर के चार गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
जेवर के कानीगढ़ी, शमशमनगर, पुरननगर और झुप्पा गांवों के खेतों तक नदी का पानी पहुंच चुका है। स्थिति यह है कि कुछ गांवों में पानी अब घरों से केवल 50 मीटर की दूरी पर है। मकनपुर खादर और लतीफपुर जैसे गांवों में तो जंगल और खेत पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं।