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याददाश्त को बनाए रखने के लिए सुपर-एजर्स का रहस्य

क्या आप जानते हैं कि कुछ लोग 80 साल की उम्र में भी अपनी याददाश्त को 40-50 साल के लोगों के समान बनाए रख सकते हैं? वैज्ञानिकों ने इन 'सुपर-एजर्स' का अध्ययन किया है और पाया है कि उनकी याददाश्त के पीछे एक अद्वितीय मस्तिष्क संरचना और सामाजिक जुड़ाव का महत्वपूर्ण योगदान है। इस लेख में जानें कि कैसे ये लोग अपनी मानसिक क्षमता को बनाए रखते हैं और क्या हम भी ऐसा कर सकते हैं।
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याददाश्त को बनाए रखने के लिए सुपर-एजर्स का रहस्य

सुपर-एजर्स: उम्र के बावजूद तेज याददाश्त


यह सामान्य धारणा है कि उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त में कमी आना स्वाभाविक है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके लिए उम्र केवल एक संख्या है। वैज्ञानिकों ने इस विचार को चुनौती दी है कि जैसे-जैसे व्यक्ति बूढ़ा होता है, उसकी सोचने-समझने की क्षमता और याददाश्त में कमी आना अनिवार्य है। 25 वर्षों की शोध के बाद, उन्होंने कुछ व्यक्तियों की पहचान की है, जिन्हें "सुपर-एजर्स" कहा जाता है। ये लोग 80 वर्ष से अधिक आयु के हैं, लेकिन उनकी याददाश्त 40 या 50 वर्ष के लोगों के समान तेज है। शोध से यह भी पता चला है कि इसका रहस्य केवल उनके आहार में नहीं, बल्कि उनके मस्तिष्क की अद्वितीय संरचना और सामाजिक संबंधों की प्रकृति में भी छिपा है। क्या हम भी अपने मस्तिष्क को सुपर-एजर जैसा बना सकते हैं? आइए जानें...


25 वर्षों से, नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन के वैज्ञानिक उन 80 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों पर शोध कर रहे हैं, जिनकी याददाश्त 40 से 50 वर्ष के लोगों जैसी है। इन व्यक्तियों को "सुपर-एजर्स" का नाम दिया गया है। यह शोध उस पुरानी धारणा को चुनौती देता है कि उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क की कार्यक्षमता में कमी आना अनिवार्य है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कुछ लोग उम्र बढ़ने के बावजूद अपनी मजबूत याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता को बनाए रखने में सफल रहते हैं।


सुपर-एजर्स का रहस्य

नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के फ़ाइनबर्ग स्कूल ऑफ़ मेडिसिन की डॉ. सैंड्रा वेनट्रॉब के अनुसार, इन व्यक्तियों का मस्तिष्क सामान्य बुजुर्गों के मस्तिष्क से काफी भिन्न होता है। शोध में दो मुख्य बातें सामने आई हैं:


प्रतिरोध (Resistance)
सुपर-एजर्स के मस्तिष्क में अल्जाइमर से संबंधित हानिकारक प्रोटीन—जैसे एमाइलॉइड और टाऊ—का निर्माण नहीं होता।


लचीलापन (Resilience)
यदि ये प्रोटीन बन भी जाएं, तो भी इनका मस्तिष्क पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।


मस्तिष्क की अनोखी संरचना

जब वैज्ञानिकों ने इन सुपर-एजर्स के मस्तिष्क का अध्ययन किया, तो वे पूरी तरह से चकित रह गए। सामान्यतः, उम्र के साथ मस्तिष्क की बाहरी परत पतली होती जाती है; लेकिन "सुपर-एजर्स" में यह परत वैसी की वैसी बनी रहती है।


इनके मस्तिष्क में विशेष प्रकार के न्यूरॉन्स—जिन्हें 'वॉन इकोनॉमो न्यूरॉन्स' कहा जाता है—की संख्या अधिक होती है, जो सामाजिक व्यवहार से संबंधित होते हैं। उनके एंटोरहिनल कॉर्टेक्स—जो याददाश्त के लिए जिम्मेदार मुख्य भाग है—में मौजूद कोशिकाएं काफी बड़ी और स्वस्थ पाई गईं।


सामाजिक जुड़ाव का महत्व

अकेलापन नहीं, बल्कि मेल-जोल याददाश्त को सुरक्षित रखता है!
शोध से यह स्पष्ट हुआ है कि भले ही ये लोग विभिन्न प्रकार की शारीरिक गतिविधियों में संलग्न हों, लेकिन उनमें एक समानता है: वे सभी सामाजिक रूप से अत्यधिक सक्रिय हैं। उनके गहरे सामाजिक संबंध और दूसरों के साथ निरंतर बातचीत उनके मस्तिष्क को युवा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


डॉ. टैमर गेफेन के अनुसार, इन 'सुपर-एजर्स' के अध्ययन से प्राप्त जानकारी भविष्य में अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए नई दवाओं और उपचार विधियों के विकास में सहायक होगी।