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रेडीमेड फूड्स: स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव और सावधानियां

रेडीमेड फूड्स की खरीदारी करते समय पैकिंग पर दी गई जानकारी को नजरअंदाज करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इस लेख में, डाइटीशियन द्वारा बताए गए महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान दिया गया है, जैसे ट्रांसफैट, प्रिजर्वेटिव कैमिकल्स और आर्टिफिशियल स्वीटनर्स, जो धीरे-धीरे स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। जानें कि कैसे इन खाद्य पदार्थों का सेवन आपके स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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रेडीमेड फूड्स: स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव और सावधानियां

रेडीमेड फूड्स की खरीदारी में सावधानी


(हेल्थ कार्नर) :- जब हम रेडीमेड खाद्य उत्पाद खरीदते हैं, तो अक्सर उनकी पैकिंग पर दी गई जानकारी को नजरअंदाज कर देते हैं। इनमें कई तत्व होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए, इन्हें खरीदते समय विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। डाइटीशियन इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रही हैं।


ट्रांसफैट का ध्यान रखें

ट्रांसफैट को न करें नजरअंदाज – स्नैक्स, बिस्किट, चिप्स और अन्य तले हुए उत्पादों में अक्सर ट्रांसफैट पाया जाता है। यह एक प्रकार की असंतृप्त वसा है, जो वेजिटेबल ऑइल में हाइड्रोजनीकरण प्रक्रिया से मिलाई जाती है। इसके उपयोग से इन खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव होता है। ट्रांसफैट मोटापे, लिवर और हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए, इनका सेवन कम से कम करना चाहिए। कभी-कभी पैकिंग पर अन्य प्रकार के फैट का उल्लेख होता है, लेकिन ट्रांसफैट का नहीं। ऐसे में, पॉलीअनसैच्युरेटिड, मोनोअनसैच्युरेटिड और सैच्युरेटिड फैट के योग को कुल फैट से घटाने पर जो अंतर मिलता है, वह ट्रांसफैट होता है।


एक्सपायरी डेट का ध्यान रखें






एक्सपायरी डेट का रखें खयाल – जिन खाद्य पदार्थों की एक्सपायरी डेट समाप्त हो चुकी हो, उन्हें न खरीदें। ऐसे उत्पाद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। कभी-कभी टिन में बंद उत्पाद पर एक्सपायरी डेट सही होती है, लेकिन टिन फूली या पिचकी हो सकती है। ऐसे उत्पादों में फंगस हो सकता है। साथ ही, जिन चीजों की पैकिंग थोड़ी भी खुली हो, उन्हें लेने से बचें।







कैमिकल्स का स्वास्थ्य पर प्रभाव

कैमिकल करते हैं बीमार –


प्रिजर्वेटिव कैमिकल: खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रिजर्वेटिव का उपयोग किया जाता है। ये कैमिकल्स धीरे-धीरे शरीर को बीमार कर सकते हैं और कैंसर व हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकते हैं।


टेस्ट इन्हैंसर: खाद्य पदार्थों के स्वाद को बढ़ाने के लिए टेस्ट इन्हैंसर का उपयोग किया जाता है, जिससे मोटापा, याददाश्त में कमी, थायरॉइड, अनियमित माहवारी और पेट में अल्सर जैसी समस्याएं हो सकती हैं।


आर्टिफिशियल स्वीटनर: बाजार में मिलने वाले जूस और फ्लेवर्ड मिल्क भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। इनमें प्रिजर्वेटिव के साथ मिठास बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल स्वीटनर का उपयोग किया जाता है, जो बच्चों में मोटापे और डायबिटीज का एक बड़ा कारण बन रहा है।