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लोहड़ी: सर्दियों में सेहत का खजाना, जानें क्यों जरूरी हैं तिल, मूंगफली और गुड़

लोहड़ी, जो हर साल 13 जनवरी को मनाई जाती है, केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह सर्दियों में शरीर की आवश्यकताओं को पूरा करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस लेख में जानें कि कैसे तिल, मूंगफली और गुड़ जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ सर्दियों में शरीर को गर्मी, ऊर्जा और पोषण प्रदान करते हैं। यह पर्व न केवल आनंद का प्रतीक है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी एक समझदारी भरा कदम है।
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लोहड़ी: सर्दियों में सेहत का खजाना, जानें क्यों जरूरी हैं तिल, मूंगफली और गुड़

लोहड़ी का महत्व और सर्दियों की जरूरतें


नई दिल्ली : हर वर्ष 13 जनवरी को मनाया जाने वाला लोहड़ी का त्योहार उत्तर भारत में सर्दियों के प्रमुख उत्सवों में से एक है। इस दिन आग जलाकर, ढोल की थाप पर नाच-गाना होता है और तिल, मूंगफली और गुड़ जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों का आदान-प्रदान किया जाता है। इसे सांस्कृतिक परंपरा माना जाता है, लेकिन वास्तव में लोहड़ी का संबंध केवल उत्सव से नहीं, बल्कि शरीर की मौसमी आवश्यकताओं से भी है।


सर्दियों में शरीर की आवश्यकताएँ

जनवरी का मध्य साल का सबसे ठंडा समय होता है। इस दौरान शरीर को गर्म रखने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है और पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यदि इस मौसम में हल्का या ठंडी तासीर वाला भोजन लिया जाए, तो शरीर जल्दी थकान और कमजोरी महसूस कर सकता है। इसलिए लोहड़ी पर ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है जो शरीर को गर्मी और पोषण प्रदान करें।


लोहड़ी और मौसम का संबंध

लोहड़ी का समय प्राकृतिक रूप से शरीर की ऊष्मा संतुलन की परीक्षा लेता है। ठंड में शरीर अधिक कैलोरी जलाता है और अंदरूनी गर्मी बनाए रखने की कोशिश करता है। इसे संतुलित रखने के लिए गर्म तासीर वाले और ऊर्जा से भरपूर खाद्य पदार्थों की आवश्यकता होती है। लोहड़ी का पारंपरिक भोजन इसी सिद्धांत पर आधारित है, जिसे हमारे पूर्वजों ने अनुभव और प्रकृति के अवलोकन से विकसित किया।


तिल: सर्दियों का सुपरफूड

तिल को आयुर्वेद में ठंड के मौसम के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। इसमें मौजूद हेल्दी फैट और कैल्शियम शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं। तिल जोड़ों की अकड़न और ठंड से होने वाले दर्द को कम करने में सहायक होता है। यही कारण है कि सर्दियों में तिल के लड्डू और चिक्की का सेवन आम है। लोहड़ी पर तिल खाने की परंपरा शरीर को मजबूती देने से जुड़ी हुई है।


मूंगफली: ऊर्जा का स्रोत

मूंगफली को अक्सर हल्के नाश्ते के रूप में देखा जाता है, लेकिन सर्दियों में इसका महत्व बढ़ जाता है। इसमें प्रोटीन और अच्छे फैट की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करती है। ठंड के मौसम में मूंगफली मांसपेशियों को ताकत देती है और कमजोरी से बचाती है। लोहड़ी की आग के पास बैठकर मूंगफली खाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि शरीर को गर्म रखने का एक तरीका भी है।


गुड़: पाचन का प्राकृतिक उपाय

लोहड़ी पर गुड़ का सेवन मिठास के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य लाभ के लिए किया जाता है। गुड़ पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। इसमें मौजूद आयरन थकान को कम करता है और शरीर को ताकत देता है। यही कारण है कि सर्दियों में गुड़ को सफेद चीनी से बेहतर माना जाता है।


तिल, मूंगफली और गुड़ का संयोजन

इन तीनों चीजों को एक साथ खाने के पीछे वैज्ञानिक सोच छिपी है। तिल और मूंगफली में मौजूद फैट, गुड़ में पाए जाने वाले खनिज तत्वों को शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित करने में मदद करते हैं। यह संयोजन शरीर को गर्मी, ऊर्जा और बेहतर पाचन प्रदान करता है, बिना ब्लड शुगर को अचानक बढ़ाए। इसे सर्दियों के लिए एक प्राकृतिक और संतुलित न्यूट्रिशन पैकेज कहा जा सकता है।


आधुनिक जीवनशैली में बदलाव

आजकल की जीवनशैली में लोहड़ी पर पारंपरिक खाने की जगह केक, चॉकलेट और कोल्ड ड्रिंक्स ने ले ली है। इससे त्योहार का असली उद्देश्य कहीं खोता जा रहा है। सर्दियों में ठंडे और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ पाचन को कमजोर करते हैं और इम्यूनिटी पर भी असर डालते हैं।


स्वास्थ्य विज्ञान और परंपरा

लोहड़ी का भोजन कोई साधारण रिवाज नहीं, बल्कि मौसम के अनुरूप शरीर को संतुलित रखने की एक वैज्ञानिक परंपरा है। तिल, मूंगफली और गुड़ मिलकर सर्दियों में शरीर को वही प्रदान करते हैं जिसकी उसे सबसे अधिक जरूरत होती है—गर्मी, ऊर्जा और मजबूत पाचन। यही कारण है कि लोहड़ी केवल उत्सव नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा एक समझदारी भरा पर्व भी है।