सोशल जेटलैग: एक छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या और इसके समाधान
सोशल जेटलैग क्या है?
नई दिल्ली: क्या आप सप्ताह के दिनों में जल्दी उठते हैं लेकिन वीकेंड पर देर तक जागते हैं और अधिक सोते हैं? यदि हां, तो आप 'सोशल जेटलैग' से प्रभावित हो सकते हैं, जो आजकल लाखों लोगों के लिए एक छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या बन गई है। यह तब होता है जब आपकी प्राकृतिक बॉडी क्लॉक, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है, आपके सोने के नियमित समय से मेल नहीं खाती।
इस बदलाव के कारण दिमाग और शरीर में भ्रम उत्पन्न होता है, जैसे कि बार-बार टाइम जोन बदलने की स्थिति। सोशल जेटलैग आमतौर पर छात्रों, कामकाजी पेशेवरों और अनियमित दिनचर्या वाले व्यक्तियों में देखा जाता है। समय के साथ, यह शरीर के विभिन्न सिस्टम पर तनाव डालता है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
सर्केडियन रिदम की परिभाषा
सर्केडियन रिदम आपके शरीर की 24 घंटे की आंतरिक घड़ी है। यह निर्धारित करती है कि आपको कब जागना है या सोना है, और हार्मोन रिलीज, मेटाबॉलिज्म, पाचन, शरीर का तापमान और सेल रिपेयर जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करती है। जब यह रिदम बाधित होती है, तो शरीर को सही तरीके से कार्य करने में कठिनाई होती है।
सोशल जेटलैग के कारण
सोशल जेटलैग आमतौर पर अनियमित नींद के शेड्यूल के कारण उत्पन्न होता है। देर रात तक जागना, वीकेंड पर अधिक सोना, सोने से पहले बहुत अधिक स्क्रीन टाइम, अनियमित खाने का समय, बार-बार यात्रा करना और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं जैसे तनाव या चिंता आपकी सर्केडियन रिदम को प्रभावित कर सकती हैं।
सोशल जेटलैग के लक्षण
सोशल जेटलैग से ग्रसित व्यक्तियों को अक्सर सोने के बाद भी थकान महसूस होती है। अन्य लक्षणों में सुबह उठने में कठिनाई, दिन में नींद आना, ध्यान केंद्रित करने में कमी, मूड में बदलाव, सिरदर्द, पाचन संबंधी समस्याएं और कम उत्पादकता शामिल हैं। कई लोग इन लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
सोशल जेटलैग के जोखिम
यदि सोशल जेटलैग लंबे समय तक बना रहता है, तो यह भूख, ब्लड शुगर और तनाव को नियंत्रित करने वाले हार्मोनों को प्रभावित कर सकता है। इससे मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, टाइप 2 डायबिटीज़, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है। यह इम्यूनिटी को भी कमजोर करता है, सेल रिपेयर की प्रक्रिया को धीमा करता है और शरीर में सूजन को बढ़ाता है।
सोशल जेटलैग से बचने के उपाय
आप वीकेंड पर भी नियमित सोने और जागने का शेड्यूल अपनाकर सोशल जेटलैग को कम कर सकते हैं। सुबह तेज धूप लें और सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन टाइम कम करें। देर शाम कैफीन, भारी भोजन और शराब से बचें। दिन में व्यायाम करें और सोने का समय आने पर अपने शरीर को संकेत देने के लिए शांत सोने की दिनचर्या का पालन करें। रोजाना छोटे-छोटे बदलाव आपकी बॉडी क्लॉक को संतुलित रख सकते हैं और आपकी समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।
