हाइपोथायरायडिज्म और वजन बढ़ने का संबंध: जानें उपाय
थायरॉयड की समस्या और इसके प्रभाव
थायरॉयड आजकल की बिगड़ती जीवनशैली का परिणाम है, जिससे खासकर महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
यह केवल गले की ग्रंथि की समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा उत्पादन और हार्मोन संतुलन पर भी असर डालता है। जब थायरॉयड ग्रंथि हार्मोन का सही उत्पादन नहीं कर पाती, तो हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म जैसी स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं। इस लेख में हम हाइपोथायरायडिज्म और इसके वजन बढ़ने से जुड़े पहलुओं पर चर्चा करेंगे।
हाइपोथायरायडिज्म में ग्रंथि की गतिविधि कम हो जाती है, जिससे हार्मोन का उत्पादन घटता है। इसका प्रभाव शरीर की कैलोरी जलाने की क्षमता पर पड़ता है, जिससे पाचन धीमा हो जाता है, थकान बढ़ती है, और वजन धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। आयुर्वेद में इसे कफ और वात दोष के असंतुलन से जोड़ा गया है, जो शरीर में भारीपन और सूजन का कारण बनता है। इस स्थिति में शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिससे मोटापा बढ़ता है।
थायरॉयड से जुड़ी सबसे बड़ी समस्या वजन बढ़ना है, जिसे नियंत्रित करना आवश्यक है।
इसके लिए आयुर्वेद में कई सरल उपाय सुझाए गए हैं। वजन कम करने के लिए मेटाबॉलिज्म का सही होना जरूरी है। इसके लिए सोंठ, काली मिर्च और पिप्पली से बने त्रिकटु चूर्ण का उपयोग किया जा सकता है। यह चूर्ण पाचन अग्नि को सुधारता है और मेटाबॉलिज्म को मजबूत बनाता है। इसे रोजाना शहद के साथ लिया जा सकता है।
एक और उपाय गुग्गुल कल्प है, जो वजन घटाने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है। यह लसीका तंत्र को सक्रिय करता है, जिससे वसा चयापचय में सुधार होता है। तीसरा उपाय गिलोय और नीम का रस है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और रक्त को शुद्ध करता है।
गिलोय और नीम का रस थायरॉयड हार्मोन को संतुलित करने में मदद करता है और टी-3 तथा टी-4 के उत्पादन को बढ़ाता है। नींबू और शहद का पानी वजन कम करने में सहायक होता है, और इसे सुबह खाली पेट लेना चाहिए। यह मेटाबॉलिक एक्टिवेशन को बढ़ावा देता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और दैनिक कार्यों में कोई परेशानी नहीं होती।
