Newzfatafatlogo

H-1B वीजा होल्डर्स के लिए अमेरिका में बढ़ती चुनौतियाँ

अमेरिका में H-1B वीजा धारकों के लिए स्थिति लगातार कठिन होती जा रही है। वीजा स्टैम्पिंग में देरी के कारण हजारों भारतीय पेशेवर भारत में फंसे हुए हैं, जिससे उनकी नौकरी और भविष्य की योजनाओं पर संकट आ गया है। इस लेख में, हम इस संकट के विभिन्न पहलुओं, जैसे जॉब सिक्योरिटी, सैलरी में कटौती, टैक्स समस्याएँ और परिवारों पर प्रभाव की चर्चा करेंगे। जानें कि H-1B वर्कर्स इस अनिश्चितता से बाहर निकलने के लिए क्या उपाय कर रहे हैं।
 | 
H-1B वीजा होल्डर्स के लिए अमेरिका में बढ़ती चुनौतियाँ

H-1B वीजा धारकों की कठिनाइयाँ


अमेरिका में कार्यरत भारतीय H-1B वीजा धारकों के लिए स्थिति लगातार कठिन होती जा रही है। वीजा स्टैम्पिंग में अप्रत्याशित देरी के कारण हजारों पेशेवर भारत में फंसे हुए हैं। इस देरी ने न केवल उनकी वापसी को रोका है, बल्कि उनकी नौकरी, वेतन और भविष्य की योजनाओं पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। कई कर्मचारियों को कंपनियों से स्पष्ट संदेश मिल रहा है कि या तो जल्दी लौटें या नौकरी छोड़ने के लिए तैयार रहें।


वीजा प्रक्रिया में बदलाव का प्रभाव

यह संकट दिसंबर 2025 के बाद और बढ़ गया, जब अमेरिकी वीजा प्रक्रिया में सोशल मीडिया अकाउंट की पुष्टि को अनिवार्य किया गया। वीजा अपॉइंटमेंट की तारीखें अचानक आगे बढ़ गईं, जिससे भारत आए H-1B वर्कर्स महीनों तक यहीं अटक गए। इस दौरान अमेरिकी कंपनियों की चिंताएँ बढ़ गईं, जिसका सीधा असर कर्मचारियों पर पड़ा। अब यह केवल इमिग्रेशन समस्या नहीं, बल्कि आजीविका से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।


जॉब सिक्योरिटी पर खतरा

भारत में लंबे समय तक फंसे रहने से H-1B वर्कर्स की नौकरी पर सीधा खतरा उत्पन्न हो गया है। विशेष रूप से स्टार्टअप्स और छोटी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को अधिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। कई कंपनियाँ पेड लीव खत्म होते ही कर्मचारियों को अमेरिका लौटने का अल्टीमेटम दे रही हैं। लौटने में असमर्थ रहने पर टर्मिनेशन की चेतावनी दी जा रही है, जिससे वर्कर्स मानसिक तनाव में हैं।


सैलरी में कटौती और बिना वेतन छुट्टी

वीजा में देरी का असर सैलरी पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। कुछ कंपनियाँ कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी पर भेज रही हैं, जबकि कुछ स्थानों पर सैलरी में आंशिक कटौती की जा रही है। इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी कंपनियाँ फिर भी समाधान निकालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन छोटी कंपनियों के पास सीमित संसाधन हैं। नतीजतन, कर्मचारी आर्थिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।


टैक्स और कानूनी समस्याएँ

भारत में लंबे समय तक रुकने से H-1B वर्कर्स पर टैक्स से जुड़ी नई जिम्मेदारियाँ भी आ सकती हैं। यदि वे भारत में टैक्स रेजिडेंट की श्रेणी में आ जाते हैं, तो उन्हें यहाँ टैक्स भरना पड़ सकता है। अमेरिका और भारत के बीच टैक्स नियमों की जटिलता इस समस्या को और बढ़ा देती है। इसी कारण कई वर्कर्स अब कानूनी सलाह लेने को मजबूर हो रहे हैं।


परिवारों पर प्रभाव

वीजा में देरी का असर केवल नौकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। कई मामलों में पति या पत्नी अमेरिका में हैं, जबकि वीजा धारक भारत में फंसा हुआ है। इस दौरान अमेरिका में घर का किराया, कार लीज और अन्य खर्च लगातार चल रहे हैं। आय रुकने या घटने से परिवारों की आर्थिक स्थिति पर भारी दबाव पड़ रहा है।


समाधान की खोज

H-1B वर्कर्स इस अनिश्चितता से बाहर निकलने के लिए हर संभव रास्ता तलाश रहे हैं। कुछ लोग कंपनियों से अतिरिक्त समय मांग रहे हैं, तो कुछ इमिग्रेशन लॉयर्स की मदद ले रहे हैं। हालांकि, वर्तमान में स्थिति स्पष्ट नहीं है। जब तक वीजा स्टैम्पिंग प्रक्रिया सामान्य नहीं होती, तब तक हजारों भारतीय पेशेवर इसी असमंजस में फंसे रहेंगे कि अमेरिका लौटें या अपनी नौकरी गंवाने का जोखिम उठाएं।