गर्मियों में ठंडक पाने के लिए प्राचीन प्राणायाम तकनीकें
गर्मी में राहत के लिए पारंपरिक उपाय
गर्मियों के दौरान, जब सूरज की गर्मी और नमी अपने चरम पर होती है, तो हम अक्सर राहत पाने के लिए पारंपरिक तरीकों का सहारा लेते हैं, जैसे बर्फ, आइसक्रीम, ठंडा पानी या कोल्ड ड्रिंक्स। इसके अलावा, घरों और दफ्तरों को ठंडा रखने के लिए हम पंखे, एयर कूलर और एयर कंडीशनर का उपयोग करते हैं। हालांकि, ये सभी उपाय केवल अस्थायी ठंडक प्रदान करते हैं और शरीर को अंदर से ठंडा नहीं कर पाते। जब शरीर अंदर से ठंडा रहता है, तो यह समग्र स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है।
प्राचीन परंपराओं की ओर लौटना
हमारी आधुनिक जीवनशैली में, हम धीरे-धीरे अपनी प्राचीन परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं। अतीत में, लोग अपने शरीर को स्वाभाविक रूप से ठंडा रखने के लिए कई उपाय अपनाते थे, जो आज भी वैज्ञानिक रूप से प्रभावी माने जाते हैं। योगाचार्य उमंग त्यागी ने कई खान-पान संबंधी सलाह और तकनीकें साझा की हैं, जो गर्मियों में ठंडा रहने में मदद कर सकती हैं।
प्राचीन ग्रंथों में प्राणायाम का महत्व
योगाचार्य उमंग त्यागी के अनुसार, *हठ योग प्रदीपिका*—जो 5,000 साल पुराना है—में तीन विशेष प्राणायामों का उल्लेख है, जो शरीर को अंदर से ठंडा रखने में सहायक होते हैं। आचार्य स्वात्माराम ने इसमें आठ प्रकार के कुंभकों का वर्णन किया है, जिनमें से तीन विशेष प्राणायाम पित्त-शामक हैं, यानी ये शरीर में गर्मी को कम करते हैं।
शीतली प्राणायाम
पहला प्राणायाम जो योगाचार्य उमंग सुझाते हैं, वह है *शीतली*। इसे करने के लिए, आपको अपनी जीभ को बाहर निकालकर उसे नली के आकार में मोड़ना होगा। फिर, इस नली के माध्यम से गहरी साँस लें। साँस लेने के बाद, जीभ को अंदर खींचकर मुँह बंद करें और कुछ सेकंड के लिए साँस रोकें। अंत में, नाक से धीरे-धीरे साँस छोड़ें।
शीतकारी प्राणायाम
दूसरा प्राणायाम *शीतकारी* है। जो लोग जीभ को नली जैसा आकार नहीं दे पाते, वे इस तकनीक का उपयोग कर सकते हैं। इसमें, आप मुँह को ऐसे खोलते हैं जैसे मुस्कुरा रहे हों और फिर गहरी साँस लेते हैं।
चंद्रभेदी प्राणायाम
गर्मी में ठंडक पाने के लिए *चंद्रभेदी प्राणायाम* का अभ्यास करें। इसमें, दाईं नासिका को बंद करके बाईं नासिका से साँस लें और फिर बाईं नासिका को बंद करके दाईं नासिका से साँस छोड़ें।
प्राणायाम के लाभ
ये प्राणायाम आपकी इड़ा नाड़ी को सक्रिय करते हैं, जिससे शरीर का तापमान कम होता है और मन को शांति मिलती है। आधुनिक विज्ञान भी इन प्रभावों को मानता है, यह मानते हुए कि शीतली प्राणायाम का अभ्यास शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है।
किसे बचना चाहिए?
उमंग त्यागी सलाह देते हैं कि यदि आप कफ, निम्न रक्तचाप, अस्थमा या अवसाद से पीड़ित हैं, तो आपको इन प्राणायामों से बचना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी इन तकनीकों को अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
