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भारत में विवाह के बदलते स्वरूप: डेटिंग ऐप्स का बढ़ता चलन

भारत में विवाह के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आ रहा है, जिसमें डेटिंग ऐप्स का बढ़ता चलन प्रमुख है। Gleeden जैसे प्लेटफार्मों पर महिला उपयोगकर्ताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो दर्शाता है कि महिलाएं अब अपनी खुशी के लिए साहसिक निर्णय लेने में संकोच नहीं कर रही हैं। इस लेख में जानें कि कैसे कॉर्पोरेट जीवन की व्यस्तता और भावनात्मक जुड़ाव की कमी लोगों को डिजिटल दुनिया की ओर धकेल रही है।
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भारत में विवाह के बदलते स्वरूप: डेटिंग ऐप्स का बढ़ता चलन

शादी का नया नजरिया


भारत में विवाह को सदियों से सात जन्मों का अटूट बंधन माना जाता रहा है, लेकिन हाल के आंकड़े इस धारणा को चुनौती दे रहे हैं। शादी के बाहर डेटिंग प्लेटफार्मों का बढ़ता प्रचलन पारंपरिक रिश्तों में बदलाव का संकेत दे रहा है। हाल ही में, डेटिंग ऐप Gleeden ने भारत में 40 लाख (4 मिलियन) उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा पार कर लिया है, जो यह दर्शाता है कि लोगों का विवाह और विवाह के बाहर के रिश्तों के प्रति दृष्टिकोण बदल रहा है।


महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि

इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला उपयोगकर्ताओं की संख्या में वृद्धि है। जबकि इस ऐप पर पुरुष उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 65% है, महिला उपयोगकर्ताओं की संख्या 35% है। पिछले दो वर्षों में, महिला उपयोगकर्ताओं की संख्या में 148% की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।


ये आंकड़े दर्शाते हैं कि महिलाएं अब अपनी खुशी के लिए साहसिक निर्णय लेने में संकोच नहीं कर रही हैं। बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में, जहां महिलाएं अपने जीवनसाथी के साथ स्थिरता चाहती हैं, वहीं वे रोमांच की तलाश में रिश्तों के बाहर भी देख रही हैं।


भावनात्मक दूरी का कारण

एक मुख्य कारण है व्यक्तिगत समय की कमी—कॉर्पोरेट जीवन की व्यस्तता और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना। इसके साथ ही, जीवनसाथी के साथ भावनात्मक जुड़ाव की कमी भी एक महत्वपूर्ण कारक है। ऐसी परिस्थितियों में, भावनात्मक निकटता की कमी लोगों को डिजिटल प्लेटफार्मों की ओर आकर्षित करती है। उपयोगकर्ता अक्सर काम के ब्रेक के दौरान या देर रात इन ऐप्स का उपयोग करते हैं, ताकि अपनी नीरस दिनचर्या में कुछ रोमांच जोड़ सकें।


सबसे सक्रिय शहर

भारत के प्रमुख शहर जैसे बेंगलुरु और हैदराबाद इस सूची में सबसे ऊपर हैं, लेकिन लखनऊ और सूरत जैसे छोटे शहर भी पीछे नहीं हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन ऐप्स का उपयोग दोपहर 12:00 बजे से 3:00 बजे के बीच और रात 10:00 बजे से 12:00 बजे के बीच सबसे अधिक होता है।