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गर्मी में UV-प्रोटेक्टिव कपड़ों का बढ़ता चलन

गर्मी के मौसम में UV-प्रोटेक्टिव कपड़ों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ये कपड़े UV किरणों से सुरक्षा प्रदान करते हैं और फैशन का हिस्सा बन गए हैं। जानें कैसे ये कपड़े काम करते हैं, UPF का महत्व क्या है, और क्या सनस्क्रीन की आवश्यकता खत्म हो जाएगी। इस लेख में हम इस ट्रेंड के पीछे के कारणों और इसके लाभों पर चर्चा करेंगे।
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गर्मी में UV-प्रोटेक्टिव कपड़ों का बढ़ता चलन

नई दिल्ली में UV-प्रोटेक्टिव कपड़ों का ट्रेंड


नई दिल्ली: भीषण गर्मी और तेज धूप के चलते लोग अब केवल सनस्क्रीन पर निर्भर नहीं रह रहे हैं। बाजार में ऐसे कपड़ों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जो UV किरणों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। जैकेट, शर्ट, ट्राउजर, टोपी, ग्लव्स और स्कार्फ जैसे वस्त्र अब UV-प्रोटेक्टिव तकनीक के साथ उपलब्ध हैं।


ये कपड़े विशेष तकनीक से बनाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य सूरज की हानिकारक UVA और UVB किरणों को त्वचा तक पहुंचने से रोकना है। इस कारण यह ट्रेंड अब फैशन के साथ-साथ त्वचा की सुरक्षा का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।


UV-प्रोटेक्टिव कपड़ों की कार्यप्रणाली

इन कपड़ों में सामान्य फैब्रिक की तुलना में अधिक घनी बुनाई की जाती है, जिससे धूप की किरणें आसानी से अंदर नहीं जा पातीं। इसके अलावा, इनमें पॉलिएस्टर, नॉयलॉन और हाई-टेक कॉटन जैसे फैब्रिक का उपयोग किया जाता है, जो UV किरणों को प्रभावी ढंग से ब्लॉक करते हैं।


कई कंपनियां कपड़ों पर विशेष UV-ब्लॉकिंग कोटिंग भी करती हैं, जिसमें जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे तत्व शामिल होते हैं, जो UV किरणों को परावर्तित करने में मदद करते हैं।


UPF का महत्व

जैसे सनस्क्रीन में SPF होता है, वैसे ही इन कपड़ों में UPF यानी पराबैंगनी सुरक्षा कारक होता है। यह दर्शाता है कि कपड़ा कितनी UV किरणों को रोक सकता है।


UPF 15-20: सामान्य सुरक्षा।


UPF 30-40: अच्छी सुरक्षा।


UPF 50+: बेहतरीन सुरक्षा।


UPF 50+ वाले कपड़े लगभग 98 प्रतिशत UV किरणों को रोक सकते हैं, जबकि UPF 15 से कम वाले कपड़ों को सन प्रोटेक्शन कैटेगरी में नहीं माना जाता।


UV-प्रोटेक्टिव कपड़ों का बढ़ता चलन

गर्मी, हीटवेव, सनबर्न और टैनिंग के बढ़ते खतरों के कारण लोग अब UV-प्रोटेक्टिव कपड़ों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। विशेष रूप से बाइक, साइकिल, बस और ऑटो से यात्रा करने वाले लोग इन कपड़ों को प्राथमिकता दे रहे हैं।


अब यह ट्रेंड केवल स्पोर्ट्स वियर तक सीमित नहीं है। बाजार में UV-प्रोटेक्टिव टी-शर्ट, ड्रेसेस, कैप, ग्लव्स और बच्चों के कपड़े भी उपलब्ध हैं। डार्क रंग और मोटे फैब्रिक वाले कपड़े हल्के रंगों और पतले कपड़ों की तुलना में अधिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।


क्या सनस्क्रीन की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि UV-प्रोटेक्टिव कपड़े निरंतर सुरक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सनस्क्रीन का उपयोग बंद कर दिया जाए। चेहरे, हाथ और शरीर के खुले हिस्सों पर सनस्क्रीन लगाना अभी भी आवश्यक है। साथ ही धूप का चश्मा पहनने की भी सलाह दी जाती है।


विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ये कपड़े गीले हो जाएं, तो उनकी UPF क्षमता कम हो सकती है। इसलिए बाहर निकलते समय सनस्क्रीन साथ रखना बेहतर होता है।