दिल की बीमारियों के प्रमुख कारण: विशेषज्ञ की सलाह
दिल की बीमारियों का बढ़ता खतरा
नई दिल्ली: दिल की बीमारियां आज भी वैश्विक स्तर पर मृत्यु का एक प्रमुख कारण बनी हुई हैं। कई लोग मानते हैं कि ये समस्याएं अचानक उत्पन्न होती हैं, लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि ये धीरे-धीरे विकसित होती हैं। 25 वर्षों के अनुभव वाले प्रसिद्ध हार्ट सर्जन डॉ. जेरेमी लंदन ने हाल ही में एक वीडियो में उन तीन मुख्य कारणों का उल्लेख किया है जो दिल के दौरे और मृत्यु के लिए जिम्मेदार होते हैं।
धमनियों का अवरुद्ध होना
डॉ. जेरेमी इसे 'प्लंबिंग समस्या' के रूप में वर्णित करते हैं। इसमें दिल तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में धीरे-धीरे वसा, कोलेस्ट्रॉल और कैल्शियम जमा होने लगता है। इससे रक्त वाहिकाएं संकुचित हो जाती हैं और दिल को ऑक्सीजन और पोषण की कमी का सामना करना पड़ता है। इसे चिकित्सा भाषा में एथेरोस्क्लेरोटिक कार्डियोवास्कुलर डिजीज कहा जाता है। यदि इसका उपचार नहीं किया गया, तो सीने में दर्द या हार्ट अटैक हो सकता है। डॉक्टर 'कार्डियक कैथेटराइजेशन' टेस्ट के माध्यम से इस अवरोध का पता लगाते हैं।
हार्ट वॉल्व की समस्याएं
डॉ. जेरेमी ने बताया कि दिल के भीतर कुछ वॉल्व होते हैं जो रक्त को सही दिशा में प्रवाहित करने का कार्य करते हैं। कभी-कभी ये वॉल्व कठोर, संकरे या लीक होने लगते हैं। एक सामान्य समस्या 'एओर्टिक स्टेनोसिस' है, जिसमें वॉल्व कठोर हो जाता है और ठीक से खुल नहीं पाता। इससे दिल को रक्त पंप करने में अधिक प्रयास करना पड़ता है। डॉक्टर इसे स्टेथस्कोप से सुनकर पहचान सकते हैं, और इसकी पुष्टि के लिए 'इको' टेस्ट किया जाता है।
धड़कन में गड़बड़ी
डॉक्टर ने बताया कि दिल एक प्राकृतिक इलेक्ट्रिकल सिस्टम से संचालित होता है, जो इसकी धड़कन की गति को नियंत्रित करता है। जब इस सिस्टम में कोई समस्या आती है, तो दिल बहुत तेज, बहुत धीमे या अनियमित रूप से धड़कने लगता है। इसे 'एट्रियल फिब्रिलेशन' कहा जाता है, जिसमें दिल के ऊपरी हिस्से में अजीब सी फड़फड़ाहट होती है, जिससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसके लिए डॉक्टर ईसीजी या हार्ट मॉनिटर का उपयोग करते हैं।
डॉ. जेरेमी लंदन का कहना है कि इन समस्याओं को समझकर लोग डरने के बजाय समय पर सही कदम उठा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर मिली जानकारी कभी भी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं हो सकती, इसलिए किसी भी लक्षण के दिखने पर सीधे डॉक्टर से संपर्क करना सबसे अच्छा विकल्प है।
