फैटी लिवर रोग: बच्चों में बढ़ते खतरे और बचाव के उपाय
वर्ल्ड लिवर डे: जागरूकता का दिन
हर वर्ष 19 अप्रैल को वर्ल्ड लिवर डे मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लिवर की सेहत के प्रति जागरूकता फैलाना है। इस वर्ष की थीम 'सॉलिड हैबिट्स स्ट्रॉन्ग लिवर' रखी गई है। लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो भोजन को पचाने, विषैले तत्वों को बाहर निकालने और ऊर्जा प्रदान करने में मदद करता है। हालांकि, लोग अक्सर इसकी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, फैटी लिवर रोग अब केवल वयस्कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह तेजी से बच्चों को भी प्रभावित कर रहा है।
बच्चों में फैटी लिवर का बढ़ता खतरा
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के चिकित्सकों का कहना है कि हर तीन में से एक भारतीय बच्चा इस समस्या से ग्रसित हो सकता है। यह आंकड़ा चिंताजनक है, क्योंकि पहले यह बीमारी मुख्य रूप से वयस्कों में देखी जाती थी। कई बार बच्चे स्वस्थ दिखते हैं, लेकिन उनके लिवर में धीरे-धीरे फैट जमा होता रहता है।
भारत में फैटी लिवर के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
भारत में इस बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, हर 100 बच्चों में से लगभग 35 इस समस्या से जूझ रहे हैं, जो कि वैश्विक औसत से लगभग चार गुना अधिक है। इसका मुख्य कारण बदलती जीवनशैली है, जिसमें जंक फूड, मीठे पेय, अधिक स्क्रीन टाइम और कम शारीरिक गतिविधि शामिल हैं।
पहले यह माना जाता था कि यह समस्या केवल मोटापे से संबंधित है, लेकिन अब विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य वजन वाले बच्चों में भी यह बीमारी देखी जा रही है। इसका मतलब है कि केवल वजन देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि बच्चा सुरक्षित है या नहीं।
फैटी लिवर के खतरे
फैटी लिवर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके प्रारंभिक लक्षण स्पष्ट नहीं होते। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और जब तक इसका पता चलता है, तब तक स्थिति गंभीर हो सकती है। यदि समय पर इसका इलाज नहीं किया गया, तो यह बड़ी लिवर बीमारियों में बदल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बीमारी काफी हद तक जीवनशैली से जुड़ी है। इसलिए माता-पिता को बच्चों की आदतों पर ध्यान देना आवश्यक है। सही खानपान और नियमित गतिविधियों से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बचाव के लिए अपनाएं ये 4 जरूरी आदतें
- बच्चों को संतुलित आहार दें जिसमें साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल हों।
- बच्चों को रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या आउटडोर खेल के लिए प्रेरित करें।
- मीठे पेय और जंक फूड से दूरी बनाएं।
- यदि बच्चे को मोटापा या डायबिटीज जैसी समस्या है, तो समय-समय पर जांच कराएं।
