बदलते मौसम में बच्चों की सेहत का ख्याल कैसे रखें
बदलते मौसम का प्रभाव
उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में मौसम में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है। सुबह की ठंड, दोपहर की हल्की गर्मी और शाम की सिहरन बच्चों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। चिकित्सकों के अनुसार, इस मौसम में छोटे बच्चों में वायरल, बैक्टीरियल और फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
संक्रमण के लिए सावधानी बरतें
अस्थिर मौसम में स्कूल, पार्क और भीड़-भाड़ वाली जगहें संक्रमण के लिए उपयुक्त स्थान बन सकती हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सावधानी, खानपान और स्वच्छता की आदतें बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से बचा सकती हैं।
संक्रमण का मौसम: अलर्ट
बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में उतार-चढ़ाव से बच्चों की श्वसन प्रणाली प्रभावित होती है। आम लक्षणों में सर्दी, खांसी, गले में खराश, हल्का बुखार, पेट में संक्रमण और आंखों में जलन शामिल हैं। स्कूलों में एक बच्चे से दूसरे में संक्रमण फैलने की संभावना रहती है। बंद कमरे, एसी या हीटर का गलत उपयोग और धूल संपर्क से जोखिम बढ़ता है। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों को मौसमी संक्रमण से बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
स्वच्छता: सुरक्षा का पहला कदम
बच्चों को खाना खाने से पहले और बाहर से लौटने पर साबुन से हाथ धोने की आदत डालें। नाखूनों को छोटा रखें और रूमाल तथा पानी की बोतल साझा न करने दें। छींकते या खांसते समय टिश्यू या रूमाल का उपयोग अनिवार्य करें। यह आदत वायरस और बैक्टीरिया के प्रसार को रोकने में मदद करती है। खिलौने, अध्ययन की मेज और मोबाइल की सतह को भी साफ रखना आवश्यक है। स्वच्छता संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है।
पोषण: इम्युनिटी बढ़ाने का उपाय
बच्चों की डाइट में संतरे, मौसमी, नींबू, अमरूद, आंवला, अंकुरित मूंग और हरी सब्जियां शामिल करें। रोजाना गुनगुना पानी और हल्का सूप देने से गला और पेट सुरक्षित रहते हैं। प्रोटीन और आयरन शरीर को मजबूत बनाते हैं। जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक इस मौसम में संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं, इसलिए इन्हें सीमित करें। सही आहार बच्चों की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
कपड़े और दिनचर्या: स्वास्थ्य की सुरक्षा
सुबह और शाम हल्की ऊनी परत पहनाएं और दोपहर में अतिरिक्त परत हटा दें। पसीने वाले कपड़े तुरंत बदलें, क्योंकि नमी संक्रमण को बढ़ावा देती है। बच्चों को पर्याप्त नींद और नियमित बाहरी गतिविधियों का समय दें। स्क्रीन टाइम को कम करने से आंखों और दिमाग पर तनाव कम होता है। संतुलित दिनचर्या संक्रमण से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती है।
लक्षणों की पहचान: समय पर कार्रवाई
यदि बच्चे को 24 घंटे से अधिक बुखार, अत्यधिक थकान, सांस में घरघराहट, लगातार उल्टी या आंखों में लालिमा दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। प्रारंभिक उपचार संक्रमण को गंभीर होने से रोकता है। घरेलू दवाएं बिना सलाह के न दें, क्योंकि गलत डोज हानिकारक हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही निदान ही सुरक्षित रिकवरी की कुंजी है। यह कदम बच्चे की जान भी बचा सकता है।
