बहराइच में मगरमच्छ के हमले से किशोर की मौत: ग्रामीणों में दहशत

बहराइच में मगरमच्छ का हमला
बहराइच में मगरमच्छ का हमला: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के कतर्नियाघाट वन्य प्रभाग के अंबा गांव में एक 14 वर्षीय किशोर की मगरमच्छ के हमले में जान चली गई। यह बच्चा अपनी मां के साथ नदी के किनारे चारा लेने गया था, तभी अचानक मगरमच्छ ने उस पर हमला कर दिया और उसे पानी में खींच लिया। दो दिनों की खोज के बाद, शुक्रवार को उसका शव नदी से बरामद किया गया।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, मृतक किशोर अनिल अपनी मां के साथ हल्दी के खेत के पास चारा लेने गया था। इसी दौरान गेरुआ नदी से एक मगरमच्छ बाहर आया और अनिल को अपने जबड़ों में दबोचकर गहराई में खींच लिया। ग्रामीणों ने उसे बचाने के लिए शोर मचाया, लेकिन मगरमच्छ बच्चे को पानी के अंदर ले गया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार: घटना की जानकारी मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मोटरबोट तथा गोताखोरों की मदद से खोज अभियान शुरू किया। शुक्रवार दोपहर लगभग 3 बजे किशोर का शव नदी में मिला, जिसे बाहर निकाला गया। डीएफओ सूरज ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण स्पष्ट होंगे।
मगरमच्छ के हमले की तीसरी घटना
मगरमच्छ के हमले की तीसरी घटना: यह घटना पिछले दो हफ्तों में मगरमच्छ के हमले की तीसरी वारदात है। 17 अगस्त को खैरिघाट क्षेत्र में एक सात फीट लंबे मगरमच्छ ने पांच साल के बच्चे पर हमला किया था, लेकिन उसकी मां ने लोहे की रॉड से वार कर उसे बचा लिया। अगले दिन मोतीपुर इलाके में नहर पार कर रहे 45 वर्षीय व्यक्ति पर भी मगरमच्छ ने हमला किया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
जलस्तर में वृद्धि का प्रभाव
जलस्तर में वृद्धि का प्रभाव: वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हाल की भारी बारिश के कारण नदियों, नहरों और तालाबों का जलस्तर बढ़ गया है। इसी कारण मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्रों के करीब आ रहे हैं और हमलों की घटनाएं बढ़ रही हैं। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे नदियों और जलाशयों के किनारे जाने से बचें।
ग्रामीणों में दहशत का माहौल
ग्रामीणों में दहशत का माहौल: बहराइच का यह क्षेत्र पहले भी जंगली जानवरों के हमलों का शिकार हो चुका है। भेड़ियों, तेंदुओं और हाथियों के हमले की घटनाएं यहां पहले भी दर्ज की जा चुकी हैं। मगरमच्छ के लगातार बढ़ते हमलों ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी है और प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है।