भारत में एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप की बढ़ती लोकप्रियता
ग्लीडन ऐप का चौंकाने वाला आंकड़ा
एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप ग्लीडन ने हाल ही में भारत में अपने यूजर्स की संख्या को लेकर एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया है। इस प्लेटफॉर्म पर कुल यूजर्स की संख्या अब 40 लाख से अधिक हो गई है। खासकर महिलाओं की संख्या में 148 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो पिछले दो वर्षों में देखी गई है।
पुरुषों का भरोसा शादी पर डगमगा सकता है
ग्लीडन के आंकड़ों के अनुसार, कुल यूजर्स में 65 प्रतिशत पुरुष और 35 प्रतिशत महिलाएं हैं। इनमें से अधिकांश पहले से शादीशुदा या लंबे रिश्ते में हैं। बेंगलुरु इस ऐप का सबसे बड़ा शहर बनकर उभरा है, जहां 18 प्रतिशत यूजर्स हैं। इसके बाद हैदराबाद (17 प्रतिशत), दिल्ली (11 प्रतिशत), मुंबई (9 प्रतिशत) और पुणे (7 प्रतिशत) का स्थान है। टियर-2 शहरों जैसे लखनऊ, गुवाहाटी और भुवनेश्वर में भी इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।
महिलाएं इस ऐप से क्यों जुड़ रही हैं?
आजकल की तेज़ रफ्तार जिंदगी में कई लोग खुद के लिए समय नहीं निकाल पाते। 2025-2026 के ग्लीडन और आईपीएसओएस सर्वे के अनुसार, 33 प्रतिशत लोग समय की कमी महसूस करते हैं। नौकरी की दौड़, पारिवारिक जिम्मेदारियों और घरेलू दबाव के बीच इमोशनल जुड़ाव कम हो जाता है। ऐसे में लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर थोड़ी रोमांच और समझ की तलाश कर रहे हैं।
यूजर्स औसतन रोजाना 60 से 90 मिनट चैटिंग में बिताते हैं। लंच ब्रेक और आधी रात के समय ऐप पर सबसे ज्यादा गतिविधि होती है, जो दर्शाता है कि लोग अपनी व्यस्त दिनचर्या में भी चुपके से कनेक्शन बनाए रखते हैं। जेंडर स्टिरियोटाइप अब टूट रहे हैं। पहले यह माना जाता था कि एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर्स में केवल पुरुष शामिल होते हैं, लेकिन अब यह धारणा बदल रही है।
डेटा के अनुसार, लगभग 43 प्रतिशत पुरुष और 42 प्रतिशत महिलाएं बाहर के भावनात्मक या शारीरिक रिश्तों को स्वीकार करती हैं। महिलाएं अब खुद निर्णय ले रही हैं। वे अपने मुख्य रिश्ते में स्थिरता और सुरक्षा चाहती हैं, लेकिन रोमांच और भावनात्मक संतोष कहीं और खोज रही हैं।
सोशल मीडिया और कनेक्टिविटी का प्रभाव
सोशल मीडिया और इंटरनेट की सुविधा ने बाहरी रिश्ते बनाने को और आसान बना दिया है। 60 प्रतिशत से अधिक लोग ऑनलाइन फ्लर्टिंग की आसानी को विश्वासघात बढ़ने का एक बड़ा कारण मानते हैं। ये ऐप्स गोपनीयता प्रदान करते हैं, जिससे लोग बिना किसी डर के अपनी जरूरतें व्यक्त कर सकते हैं। भारत में शादी को अभी भी एक पवित्र और आजीवन बंधन माना जाता है, लेकिन व्यस्त जीवनशैली, आर्थिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत खुशी की तलाश पुराने रिश्तों के नियमों को चुनौती दे रही है।
