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शहरों में अकेलेपन की बढ़ती समस्या और इसके समाधान के लिए नए इवेंट्स

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में, शहरों में अकेलेपन की समस्या बढ़ती जा रही है। लोग दोस्तों के साथ समय बिताने के बावजूद अकेलापन महसूस कर रहे हैं। इस समस्या का समाधान करने के लिए, कई लोग अजनबियों के साथ डिनर जैसे इवेंट्स में भाग ले रहे हैं। जानें कि ये इवेंट्स कैसे अकेलेपन को एक व्यवसाय में बदल रहे हैं और इसके पीछे के कारण क्या हैं। विशेषज्ञों से जानें कि लोग अकेलापन क्यों महसूस कर रहे हैं और इसके खतरों के बारे में।
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शहरों में अकेलेपन की बढ़ती समस्या और इसके समाधान के लिए नए इवेंट्स

अकेलेपन की बढ़ती समस्या


आजकल की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में, शहरी क्षेत्रों में अकेलेपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। भले ही लोग दोस्तों के साथ समय बिताते हैं, फिर भी वे अकेलेपन का अनुभव कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर हजारों लाइक्स और चैट्स होने के बावजूद, अधिकांश लोग अकेलापन महसूस कर रहे हैं। अब, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे शहरों में लोग सोशल मीटअप में भाग लेने के लिए पैसे खर्च कर रहे हैं। लोग 'अजनबियों के साथ डिनर' जैसे इवेंट्स में शामिल होने के लिए फीस चुका रहे हैं। इस प्रकार के इवेंट्स शहरों में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ये स्टार्टअप्स अकेलेपन को एक व्यवसाय में बदल रहे हैं, जिसे 'अकेलेपन की इकॉनमी' कहा जा सकता है। आइए जानते हैं कि यह अकेलेपन की इकॉनमी क्या है और यह मेट्रो शहरों में इतनी प्रचलित क्यों हो रही है। हम विशेषज्ञों से भी जानेंगे कि लोग अकेलापन क्यों महसूस कर रहे हैं।


अकेलेपन के कारण

अकेलेपन के क्या कारण हैं?


आइए, आकाश हेल्थकेयर की साइकियाट्रिस्ट डॉ. पवित्रा शंकर से जानते हैं कि शहरों में अकेलेपन के पीछे क्या कारण हैं। आजकल लोग डिजिटल दुनिया से थक चुके हैं और आमने-सामने बातचीत की इच्छा रखते हैं। कई लोग पढ़ाई या काम के सिलसिले में दूसरे राज्यों से आते हैं, जिससे वे अपने परिवारों से दूर रहते हैं। वे सोशल मीडिया के माध्यम से अपने परिवारों से जुड़े रहते हैं, लेकिन सार्थक बातचीत की कमी के कारण वे अकेलापन महसूस करते हैं। इस अकेलेपन को दूर करने के लिए लोग अजनबियों से मिलने के लिए पैसे खर्च करने को भी तैयार हैं। इन मीटअप्स में वे नए लोगों से मिलते हैं, बातचीत करते हैं और अपनी भावनाएं साझा करते हैं।


बड़े शहरों में अकेलापन

फोर्टिस हॉस्पिटल, फरीदाबाद के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत बंगा के अनुसार, बड़े शहरों में रहना आसान है, लेकिन अकेलापन एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। लाखों लोगों के बीच रहने के बावजूद, लोग अकेलापन महसूस कर रहे हैं। काम का दबाव, मोबाइल फोन और सोशल मीडिया ने लोगों को एक-दूसरे से दूर कर दिया है, यही कारण है कि लोग अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं। इसी संदर्भ में दिल्ली-एनसीआर में अजनबियों से मिलने का ट्रेंड बढ़ रहा है। इन मीटअप्स में लोग नए लोगों से मिलकर बात करते हैं, जिससे उनका तनाव कम होता है।


डेटिंग ऐप्स से भिन्न

डेटिंग ऐप्स से अलग


TheYukai, Ooparclub, ThriftySocial और MeetByFate जैसे सोशल नेटवर्किंग और कम्युनिटी ग्रुप्स अजनबियों से मिलने के लिए इवेंट्स का आयोजन करते हैं। इन इवेंट्स में ऐसे लोग मिलते हैं जो एक-दूसरे को नहीं जानते। ये इवेंट्स डेटिंग या डेटिंग कल्चर के लिए नहीं हैं। लोग यहां माहौल का आनंद लेने और बातचीत करने के लिए आते हैं।


सुरक्षा पर ध्यान

सुरक्षा पर ज़ोर


ये ग्रुप्स किसी भी इवेंट का आयोजन करने से पहले सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं। वे स्क्रीनिंग कॉल करते हैं, सिफारिशें मांगते हैं, पहचान सत्यापन करते हैं, और प्रतिभागियों का बैकग्राउंड चेक करते हैं। इससे लोग बिना किसी झिझक के एक-दूसरे से जुड़ पाते हैं।


अकेलापन और इसके खतरे

अकेलापन बहुत खतरनाक है


विशेषज्ञों के अनुसार, लोग अक्सर अकेलेपन को नजरअंदाज करते हैं, लेकिन यह समय के साथ डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।