12वीं के छात्रों की परीक्षा में अनियमितता: नई व्यवस्था से परेशान युवा
छात्रों की मनोदशा पर असर
कल्पना कीजिए, उन बच्चों की स्थिति क्या होगी जिन्होंने इस वर्ष 18 साल की उम्र में 12वीं की परीक्षा दी और नीट में भी शामिल हुए। यह कितना दुखद है कि तीन मई को परीक्षा देकर खुश होने वाले छात्र अब फिर से परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि उस दिन की परीक्षा सरकार और उसकी एजेंसियों की लापरवाही के कारण रद्द कर दी गई। लेकिन समस्या यहीं खत्म नहीं होती। इससे भी अधिक दुखद यह है कि लाखों बच्चे एक नई प्रणाली के शिकार बन गए हैं। वे अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की पुनः जांच के लिए भटक रहे हैं।
नई मार्किंग प्रणाली का प्रभाव
इस बार सरकार और सीबीएसई ने ऑनस्क्रीन मार्किंग प्रणाली लागू की है। इसके तहत लाखों छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके सिस्टम पर अपलोड किया गया और फिर उनकी जांच की गई।
जांच में इतनी सख्ती बरती गई कि कई छात्रों के बिना गलती के अंक काट दिए गए। इसका परिणाम यह हुआ कि एक मेधावी छात्र, जिसने इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए जेईई मेन्स में 90 पर्सेंटाइल हासिल किया, वह 12वीं में केवल 75 प्रतिशत अंक प्राप्त कर सका। सोचिए, उस पर क्या बीत रही होगी। ध्यान रहे कि जेईई मेन्स के बाद जिन छात्रों को आईआईटी में दाखिला लेना होता है, उन्हें जेईई एडवांस की परीक्षा देनी होती है, जिसके लिए 12वीं में 75 प्रतिशत अंक अनिवार्य हैं।
पुनः जांच की प्रक्रिया में कठिनाई
यह विश्वास करना कठिन है कि जेईई मेन्स में 90 पर्सेंटाइल लाने वाला छात्र 12वीं में 75 प्रतिशत अंक नहीं ला सका। लेकिन ऐसा लाखों छात्रों के साथ हुआ है। इसके अलावा, सरकार ने उत्तर पुस्तिकाओं की पुनः जांच की प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया है कि छात्र तीन दिनों से भटक रहे हैं। फीस जमा करने का पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा है और उनके पेपर अपलोड नहीं हो पा रहे हैं। इसके बावजूद, दो दिनों में लगभग दो लाख छात्रों ने आवेदन किया है। सोचिए, इन सभी छात्रों की उम्र 18 साल या उससे कम होगी। उनके मासूम मन पर इस समय क्या बीत रहा होगा, इसका अंदाजा सरकार में बैठे लोगों को नहीं है। सब जॉम्बी बन गए हैं।
