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19 वर्षीय छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में NEET एडमिशन के लिए लड़ा केस

मध्य प्रदेश के 19 वर्षीय छात्र अथर्व चतुर्वेदी ने बिना वकील के सुप्रीम कोर्ट में NEET एडमिशन के लिए केस लड़ा और अद्वितीय सफलता प्राप्त की। उन्होंने 530 अंक हासिल किए थे, लेकिन राज्य सरकार की विफलता के कारण उन्हें एडमिशन नहीं मिला। अथर्व ने साहसिकता से कोर्ट में अपनी पैरवी की और संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए न्याय प्राप्त किया। जानें इस युवा छात्र की प्रेरणादायक कहानी और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में।
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19 वर्षीय छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में NEET एडमिशन के लिए लड़ा केस

सुप्रीम कोर्ट में अद्वितीय संघर्ष

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत में केस लड़ना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन मध्य प्रदेश के जबलपुर के 19 वर्षीय छात्र अथर्व चतुर्वेदी ने यह कर दिखाया है। अथर्व ने NEET 2024-25 की परीक्षा में 720 में से 530 अंक प्राप्त किए और उनकी EWS रैंक 164 थी। हालांकि, प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए आरक्षण लागू करने में राज्य सरकार की विफलता के कारण उन्हें एडमिशन प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। अपने अधिकार के लिए अथर्व ने हार नहीं मानी और एक ऑनलाइन याचिका के माध्यम से सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां उन्होंने बिना किसी वकील के खुद अपनी पैरवी करने का साहसिक निर्णय लिया।


अथर्व का आत्मविश्वास

सीनियर वकीलों के बीच खड़ा छात्र


10 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अथर्व का मामला सुनवाई के लिए प्रस्तुत हुआ। जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने, यह 19 वर्षीय छात्र अकेला, लेकिन आत्मविश्वास से भरा हुआ खड़ा था। जैसे ही बेंच उठने वाली थी, उसने साहसिकता से कहा, 'माई लॉर्ड्स, मुझे बस 10 मिनट चाहिए।' इसके बाद, उसने संविधान के 103वें संशोधन और आर्टिकल 15(6) तथा 16(6) का उल्लेख करते हुए जजों को बताया कि ये कानूनी प्रावधान प्राइवेट और नॉन-माइनॉरिटी शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत EWS आरक्षण को अनिवार्य बनाते हैं।


सुप्रीम कोर्ट का फैसला

अथर्व को मिलेगा MBBS में एडमिशन


अथर्व की प्रभावशाली दलीलें सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने उसके पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अथर्व को एडमिशन नहीं मिलने के कारण उसके नियंत्रण से बाहर थे और राज्य के अधिकारियों ने पूर्व के न्यायिक निर्देशों का पालन नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) और मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वे एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में MBBS कोर्स में अथर्व का एडमिशन सुनिश्चित करें। इस जीत के बाद, अथर्व ने कहा कि वह थोड़े घबराए हुए थे, लेकिन उन्हें विश्वास था कि कानून उनके पक्ष में है।