2026 का मानसून: कम बारिश और कृषि पर प्रभाव
2026 का मानसून: एक नई चुनौती
2026 का मानसून: एक पुरानी कहावत है कि मौसम और इंसान की प्रकृति में कोई स्थिरता नहीं होती। मौसम में बदलाव की कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकता। गर्मी के बाद अब मानसून का इंतजार है, लेकिन मौसम विभाग की नई भविष्यवाणी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने अपने पूर्वानुमान में संशोधन करते हुए बताया है कि इस वर्ष सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है, जिससे किसानों और आम जनता में चिंता का माहौल है।
जून से सितंबर तक मौसम का पूर्वानुमान
हालिया अनुमानों के अनुसार, जून से सितंबर के बीच मानसून की वर्षा लंबी अवधि के औसत का लगभग 90 प्रतिशत रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो की सक्रियता पूरे मानसून पर प्रभाव डाल सकती है, जिससे कृषि उत्पादन, जल उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
खेती पर संभावित प्रभाव
मौसम विज्ञान विभाग का मानना है कि मानसून की बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) का केवल 90% होगी, जो पहले के अनुमान 92% से कम है। बारिश में कमी से न केवल खेती प्रभावित होगी, बल्कि इससे जल भंडारों में कमी, भूजल स्तर में गिरावट और जलविद्युत उत्पादन में कमी भी आएगी।
अल नीनो का प्रभाव
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अल नीनो को इस बदलाव का कारण बताया है, जो प्रशांत महासागर के गर्म पानी से संबंधित है। इससे भारत में गर्मी और कमजोर मानसून की स्थिति बनती है। जून में भीषण गर्मी की संभावना है, जबकि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु में सामान्य से अधिक लू चलने की संभावना है। हालांकि, राजस्थान और झारखंड में सामान्य से कम लू चलने की उम्मीद है।
अल नीनो की स्थिति
आईएमडी के प्रमुख मृत्युंजय मोहपात्रा ने कहा कि नवीनतम जलवायु मॉडल से संकेत मिलता है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अल नीनो की स्थिति विकसित होने की संभावना है। यह जून में कमजोर रूप से शुरू होगा, जुलाई और अगस्त में मध्यम होगा और सितंबर तक मजबूत हो जाएगा, जिससे वर्षा ऋतु पर असर पड़ेगा।
मानसून में देरी और फसलों पर असर
मानसून में देरी की संभावना है। पहले मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि केरल में बारिश 26 मई तक होगी, लेकिन अब यह अगले सप्ताह में कभी भी आ सकती है। बारिश में देरी और कम बारिश के कारण किसानों को फसल बोने में कठिनाई होगी, जो एक गंभीर समस्या है, क्योंकि भारत की अधिकांश कृषि भूमि बारिश पर निर्भर है।
आर्थिक वृद्धि पर प्रभाव
इस समय की स्थिति और भी गंभीर है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण डीजल और उर्वरक जैसी आवश्यक कृषि सामग्री महंगी हो गई है। कमजोर मानसून के साथ, ये बढ़ती लागत ग्रामीण समुदायों पर भारी दबाव डाल रही है, जिससे भारत की आर्थिक वृद्धि धीमी होने का खतरा है।
