62 वर्षीय पूर्व माओवादी कमांडर ने शिक्षा की ओर बढ़ाया कदम
एक नई शुरुआत की ओर
जगित्याल: एक समय था जब उनके हाथ में AK-47 होती थी और उनके नाम से जंगलों में दहशत फैली रहती थी। अब, तेलंगाना के जगित्याल में 62 वर्षीय पूर्व माओवादी कमांडर थिप्पिरी तिरुपति, जिन्हें देवजी के नाम से जाना जाता है, ने हथियार छोड़कर शिक्षा का मार्ग अपनाया है। चार दशकों तक भूमिगत रहने के बाद, उन्होंने इस साल फरवरी में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया और हाल ही में इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा देकर सबको चौंका दिया है।
चार दशकों का खौफनाक सफर
देवजी का जीवन किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है। कोरुतला के अंबेडकर नगर के निवासी, देवजी ने 1983 में अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान नक्सली आंदोलन में कदम रखा। वह प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के प्रमुख नेताओं में से एक थे और पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) के सैन्य विंग के प्रमुख भी रहे। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, देवजी पर कई राज्यों में माओवादी अभियानों की योजना बनाने के लिए लगभग 1 करोड़ रुपये का इनाम था। 44 वर्षों तक जंगलों में रहने के बाद, उन्होंने फरवरी 2026 में तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर शांति का मार्ग चुना।
1985 में फेल हुए पेपर की परीक्षा 44 साल बाद
आत्मसमर्पण के बाद, देवजी ने अपनी अधूरी पढ़ाई को पूरा करने का निर्णय लिया। उन्होंने 1985 में इंटरमीडिएट का परीक्षा दी थी, लेकिन तेलुगु पेपर में फेल हो गए थे। इसके बाद, वह पूरी तरह से माओवादी आंदोलन में शामिल हो गए। अब, इतने वर्षों बाद, उन्होंने जगित्याल जिले के कोरुतला कस्बे में मास्ट्रो जूनियर कॉलेज में उसी सेकेंड ईयर के तेलुगु पेपर की परीक्षा दी। यह परीक्षा तेलंगाना बोर्ड द्वारा आयोजित सप्लीमेंट्री एग्जाम्स का हिस्सा है।
उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़ाते हुए
बंदूक और बारूद की दुनिया से बाहर आने के बाद, देवजी ने अपनी परीक्षा की तैयारी में पूरी मेहनत की। इसके लिए उन्होंने कोरुतला के अरुणोदय डिग्री कॉलेज की लेक्चरर गंगुला लावण्या से घर पर विशेष कोचिंग भी ली। परीक्षा के बाद, देवजी के चेहरे पर संतोष का भाव था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी शिक्षा की यात्रा यहीं समाप्त नहीं होगी। देवजी ने उच्च शिक्षा जारी रखने और समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर एक शांतिपूर्ण जीवन जीने का दृढ़ संकल्प लिया है।
