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82 वर्षीय बुजुर्ग से ऑनलाइन ठगी का मामला: 7.12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी

अहमदाबाद में एक 82 वर्षीय बुजुर्ग को तीन सप्ताह तक डिजिटल रूप से बंधक बनाकर 7.12 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। जालसाजों ने बुजुर्ग को डराने के लिए फर्जी दस्तावेज और वीडियो कॉल का सहारा लिया। इस मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो कंबोडिया से संचालित एक अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह से जुड़े हैं। पुलिस ने जांच तेज कर दी है और ठगी की रकम को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है।
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82 वर्षीय बुजुर्ग से ऑनलाइन ठगी का मामला: 7.12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी

अहमदाबाद में ऑनलाइन ठगी का बड़ा मामला

अहमदाबाद: एक चौंकाने वाली घटना में, 82 वर्षीय एक बुजुर्ग को तीन सप्ताह तक डिजिटल रूप से बंधक बनाकर जालसाजों ने 7.12 करोड़ रुपये की ठगी की। इस मामले में अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कंबोडिया से संचालित एक अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह से जुड़े हुए हैं। यह गिरोह चीनी मूल के ठगों द्वारा चलाया जा रहा था।


इस धोखाधड़ी की शुरुआत 4 दिसंबर को हुई, जब बुजुर्ग को एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड का उपयोग कर कुछ प्रसिद्ध व्यक्तियों को अश्लील वीडियो भेजे गए हैं और इस संबंध में मुंबई क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज की गई है। इसके बाद, विभिन्न लोग मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी बनकर उनसे वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क करते रहे।


सावधान रहें! जालसाजों ने बुजुर्ग को डराने के लिए दो करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन के दस्तावेज दिखाए और कहा कि उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में नरेश गोयल से जोड़ा गया है। इसके बाद, वॉट्सएप वीडियो कॉल के जरिए उन्हें एक फर्जी ऑनलाइन अदालत दिखाई गई, जहां एक व्यक्ति जज की भूमिका में था। बुजुर्ग को लगातार कॉल पर रहने और डिजिटल अरेस्ट में होने की बात कही गई।


ठगों ने सीबीआई, आरबीआई, ईडी और इंटरपोल के लोगो लगे फर्जी नोटिस, पत्र और वारंट भेजे तथा जेल और बदनामी की धमकी दी। 16 से 26 दिसंबर के बीच, उन्होंने बुजुर्ग से उनके बैंक खातों, संपत्तियों और डीमैट खातों की पूरी जानकारी हासिल कर ली। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि वेरिफिकेशन के बाद सारी रकम वापस कर दी जाएगी। इसी विश्वास में आकर बुजुर्ग ने आरटीजीएस और चेक के माध्यम से कुल 7.12 करोड़ रुपये जालसाजों के खातों में ट्रांसफर कर दिए।


जांच में यह सामने आया कि यह साइबर गिरोह कंबोडिया से संचालित हो रहा था और इसके पीछे एक चीनी साइबर नेटवर्क सक्रिय था। अहमदाबाद और सूरत में रहने वाले 12 आरोपियों ने कमीशन के बदले अपने बैंक खातों का उपयोग किया। पुलिस ने अब तक 238 म्यूल यानी किराए के बैंक खातों की पहचान की है। ठगी की रकम को टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से USDT क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजा गया।


पुलिस ने आरोपियों के पास से 16 मोबाइल फोन और नकदी जब्त की है। पीड़ित बुजुर्ग ने तीन सप्ताह बाद साइबर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई, तब तक अधिकांश रकम ट्रांसफर हो चुकी थी। पुलिस केवल 10 लाख रुपये ही फ्रीज कर सकी। अहमदाबाद साइबर क्राइम ने मामला दर्ज कर आगे की जांच तेज कर दी है।