CBSE की नई मार्किंग प्रणाली पर विवाद: छात्र ने उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली में चल रही चर्चा
नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) प्रणाली इस समय देश के राजनीतिक और शैक्षिक क्षेत्रों में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में आई गिरावट और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग में हुई कथित गड़बड़ियों के कारण इस डिजिटल प्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी बीच, झारखंड के एक छात्र के ब्लॉग ने इस मुद्दे को एक बड़ा राष्ट्रीय विषय बना दिया है, जिससे बोर्ड की स्थिति कमजोर हुई है.
छात्र का ब्लॉग और उसके निष्कर्ष
रांची के सत्रह वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने खुद को इस नई मूल्यांकन प्रणाली से प्रभावित लाखों छात्रों में से एक बताया है। जब उन्हें अपने परिणामों पर संदेह हुआ, तो उन्होंने हार मानने के बजाय सरकारी खरीद पोर्टल पर उपलब्ध टेंडर के जटिल दस्तावेजों की गहराई से जांच शुरू की। सार्थक ने कई दिनों की मेहनत के बाद अपने निष्कर्षों को इंटरनेट पर साझा किया।
टेंडर शर्तों में बदलाव का आरोप
सार्थक ने अपने ब्लॉग 'हाउ सीबीएसई रीरोट रूल्स टू फेवर कोएम्प्ट एडुटेक' में आरोप लगाया है कि बोर्ड ने तीन बार टेंडर की शर्तों को जानबूझकर बदला। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया के माध्यम से हैदराबाद की कंपनी 'कोएम्प्ट एडुटेक' को लाभ पहुंचाया गया। टेंडर में पहले से मौजूद 'पूर्व में ब्लैकलिस्टेड' की शर्त को बदलकर 'वर्तमान में ब्लैकलिस्टेड' कर दिया गया, जिससे कई गंभीर सवाल उठते हैं।
दिग्गज कंपनियों को पीछे छोड़ने का खेल
छात्र के अनुसार, इस सौदे में सॉफ्टवेयर की गुणवत्ता के लिए आवश्यक 'सीएमएमआई' सर्टिफिकेशन की आवश्यकता को लेवल 5 से घटाकर लेवल 3 कर दिया गया। इसके अलावा, उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग के लिए निर्धारित न्यूनतम रिज़ॉल्यूशन को 300 डीपीआई से घटाकर 200 डीपीआई कर दिया गया। इन बदलावों के कारण उद्योग की प्रमुख कंपनी टीसीएस इस प्रतिस्पर्धा में पीछे रह गई।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस खुलासे के बाद, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने छात्र के प्रयास की सराहना की है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर इस रिपोर्ट को साझा करते हुए शिक्षा मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि बोर्ड ने कुछ अधिकारियों के लाभ के लिए लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया है।
सीबीएसई और कोएम्प्ट एडुटेक का स्पष्टीकरण
वहीं, सीबीएसई प्रशासन और कोएम्प्ट एडुटेक ने किसी भी प्रकार की धांधली से इनकार किया है। बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव पिछली कमियों को दूर करने और प्रक्रिया को सुधारने के लिए किए गए थे। कंपनी के CEO ने भी स्पष्ट किया है कि वे पूरी तरह से वैध हैं और पुरानी कानूनी अड़चनों से मुक्त हो चुके हैं।
