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CDS अनिल चौहान का बयान: आॅपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ

CDS अनिल चौहान ने पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि आॅपरेशन सिंदूर केवल रुका है, खत्म नहीं हुआ। उन्होंने पाकिस्तान में हाल के संवैधानिक संशोधनों और भारतीय सशस्त्र बलों की तैयारियों पर भी प्रकाश डाला। यह बयान पाकिस्तान की कमजोरियों को उजागर करता है और भारत की रक्षा रणनीतियों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण है। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया।
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CDS अनिल चौहान का बयान: आॅपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ

इमरजेंसी स्थितियों के लिए नया सिस्टम विकसित कर रहे हैं


CDS अनिल चौहान, पुणे: आॅपरेशन सिंदूर केवल रुका है, यह समाप्त नहीं हुआ है। भारत के इस अभियान ने पाकिस्तान को संविधान में संशोधन करने के लिए मजबूर किया है, जो इस बात का संकेत है कि पड़ोसी देश को गंभीर हार का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान ने तीनों सेनाओं को एकीकृत करने के लिए चीफ आॅफ डिफेंस फोर्स (सीडीएफ) का नया पद स्थापित किया है।


अनिल चौहान ने शुक्रवार को पुणे में पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल के दौरान यह बातें कहीं। उन्होंने बताया कि हम इमरजेंसी स्थितियों में लागू करने के लिए एक मानक प्रणाली विकसित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आॅपरेशन सिंदूर के बाद उच्च रक्षा संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सबक सामने आए हैं। भारतीय सशस्त्र बलों ने उरी, डोकलाम, गलवान, बालाकोट और आॅपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में विभिन्न कमांड व्यवस्थाओं के तहत कार्य किया है।


पाकिस्तान को संविधान में संशोधन करना पड़ा

भारत में प्रस्तावित संयुक्त थिएटर कमांड को लागू करने की समय सीमा को 30 मई 2026 तक बढ़ा दिया गया है। सशस्त्र बल इस व्यवस्था को समय से पहले लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं। पाकिस्तान में किए गए संशोधनों से यह स्पष्ट होता है कि आॅपरेशन के दौरान उसकी कई कमजोरियां उजागर हुईं। पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 243 में संशोधन से उसके उच्च रक्षा संगठन में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं।


चीफ आॅफ डिफेंस फोर्सेस का नया पद

उन्होंने बताया कि जॉइंट चीफ्स आॅफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन का पद समाप्त कर दिया गया है और इसकी जगह चीफ आॅफ डिफेंस फोर्सेस का नया पद स्थापित किया गया है। सीडीएफ का पद केवल सेना प्रमुख द्वारा संभाले जाने का प्रावधान संयुक्तता के सिद्धांत के खिलाफ है। पाकिस्तान में नेशनल स्ट्रैटजी कमांड का गठन किया गया है, जिससे पारंपरिक और रणनीतिक क्षमताओं में वृद्धि हो सकती है।


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