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अहमदाबाद में बुजुर्ग से 7.12 करोड़ की साइबर ठगी: कैसे जालसाजों ने किया धोखा?

अहमदाबाद में एक बुजुर्ग से 7.12 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की घटना ने सभी को चौंका दिया है। ठगों ने बुजुर्ग को डराने के लिए फर्जी अधिकारियों और जजों का सहारा लिया। इस धोखाधड़ी में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े हैं। जानिए इस मामले की पूरी कहानी और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।
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अहमदाबाद में बुजुर्ग से 7.12 करोड़ की साइबर ठगी: कैसे जालसाजों ने किया धोखा?

साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला


अहमदाबाद से एक हैरान करने वाली साइबर धोखाधड़ी की घटना सामने आई है, जिसमें एक ठग ने बुजुर्गों को भय और भ्रम में डालकर उनकी जीवनभर की बचत लूट ली। इस मामले में 82 वर्षीय एक व्यक्ति को लगभग तीन सप्ताह तक मानसिक दबाव में रखकर 7.12 करोड़ रुपये की ठगी की गई। अहमदाबाद की साइबर क्राइम ब्रांच ने अब तक 12 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जो एक अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह से जुड़े पाए गए हैं.


कैसे शुरू हुआ धोखाधड़ी का खेल

यह घटना 4 दिसंबर को शुरू हुई, जब एक अनजान नंबर से बुजुर्ग के मोबाइल पर कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई (TRAI) का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल हो रहा है। जालसाज ने यह भी दावा किया कि बुजुर्ग के नाम से कुछ प्रसिद्ध व्यक्तियों को आपत्तिजनक वीडियो भेजे गए हैं और इस मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज की गई है.


फर्जी वीडियो कॉल से बढ़ा डर

फर्जी अधिकारी और जज बनकर किया वीडियो कॉल


बुजुर्ग को डराने के लिए ठगों ने विभिन्न व्यक्तियों को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनाकर वीडियो कॉल करवाई। उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर 2 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है और उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले से जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा, उन्हें यह भी बताया गया कि यह मामला एक प्रसिद्ध कारोबारी से संबंधित है, जिससे उनका डर और बढ़ गया.


फर्जी कोर्ट का खेल

जालसाजों ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से बुजुर्ग को एक फर्जी ऑनलाइन कोर्ट दिखाई। इसमें एक व्यक्ति जज के रूप में बैठा था। बुजुर्ग को बताया गया कि उन्हें "डिजिटल अरेस्ट" किया जा रहा है और उन्हें 24 घंटे कॉल पर रहना होगा। इसके साथ ही, सीबीआई, ईडी, आरबीआई और इंटरपोल के फर्जी पत्र और वारंट भेजे गए, जिन पर सरकारी लोगो लगे थे.


धोखाधड़ी में करोड़ों की हानि

लुटी करोड़ों की रकम


16 से 26 दिसंबर के बीच ठगों ने बुजुर्ग से उनके बैंक खातों, संपत्तियों और डीमैट अकाउंट की पूरी जानकारी ले ली। उन्हें आश्वासन दिया गया कि जांच पूरी होने के बाद सारा पैसा वापस कर दिया जाएगा। इसी झूठे आश्वासन में बुजुर्ग ने आरटीजीएस और चेक के माध्यम से कुल 7.12 करोड़ रुपये जालसाजों के खातों में ट्रांसफर कर दिए.


अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश

अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा


जांच में यह सामने आया कि यह साइबर गिरोह कंबोडिया से संचालित हो रहा था और इसमें चीनी मूल के ठग शामिल थे। अहमदाबाद और सूरत में रहने वाले 12 लोगों ने अपने बैंक खाते किराए पर देकर इस ठगी में मदद की। पुलिस को 238 ऐसे म्यूल अकाउंट्स की जानकारी मिली, जिनका इस्तेमाल पैसे घुमाने के लिए किया गया। ठगी की रकम को टेलीग्राम चैनलों के जरिए क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदलकर विदेश भेजा गया.


पुलिस की कार्रवाई और चेतावनी

पुलिस ने आरोपियों से 16 मोबाइल फोन और नकद राशि जब्त की है। पीड़ित ने तीन हफ्ते बाद शिकायत दर्ज कराई, तब तक अधिकांश पैसा जा चुका था। पुलिस केवल 10 लाख रुपये ही रोक सकी। अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी अधिकारी के नाम पर आने वाली कॉल या वीडियो कॉल से सतर्क रहें और तुरंत पुलिस को जानकारी दें.