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दिल्ली में लाल किले के पास कार बम धमाके की चार्जशीट दाखिल, 10 आरोपी नामजद

दिल्ली के लाल किले के पास हुए भीषण कार बम धमाके के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 7500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें 10 आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें कई डॉक्टर शामिल हैं। जांच में यह सामने आया है कि आरोपी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर आतंकवादी गतिविधियों में संलग्न थे। इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौतियाँ पेश की हैं।
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दिल्ली में लाल किले के पास कार बम धमाके की चार्जशीट दाखिल, 10 आरोपी नामजद

दिल्ली के लाल किले में हुए धमाके की जांच


दिल्ली के लाल किले के निकट हुए भयानक कार बम विस्फोट के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 7500 पन्नों की चार्जशीट अदालत में पेश की है। इस चार्जशीट में 10 व्यक्तियों को नामजद किया गया है, जिन पर देशविरोधी गतिविधियों और आतंकवादी नेटवर्क चलाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह घटना 10 नवंबर 2025 को हुई, जिसमें 11 लोगों की जान गई और कई अन्य घायल हुए। घटना के बाद से देशभर में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई थीं।


जांच एजेंसियों के लिए सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि गिरफ्तार आतंकियों में से कई डॉक्टर थे। NIA के अनुसार, 8 आरोपियों में से 5 डॉक्टर हैं, जो कथित तौर पर कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित होकर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हुए। एजेंसी का दावा है कि इन लोगों ने एक गुप्त संगठन को फिर से सक्रिय किया और देश में बड़े हमलों की योजना बनाई। जांच में यह भी पता चला कि आरोपी शिक्षित और तकनीकी जानकारी रखने वाले थे, जो आधुनिक तरीकों से नेटवर्क चला रहे थे।


धमाके में इस्तेमाल विस्फोटक और तकनीकी जानकारी

चार्जशीट के अनुसार, धमाके में उपयोग किया गया टीएटीपी विस्फोटक आरोपियों द्वारा स्वयं तैयार किया गया था। इसके लिए आवश्यक रसायन और उपकरण ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से जुटाए गए थे। एजेंसी का कहना है कि आरोपी ड्रोन, रॉकेट आधारित IED और आधुनिक हथियारों का भी प्रयोग कर रहे थे। जांच में AK-47 और अन्य हथियारों के उपयोग की तैयारी के संकेत भी मिले हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह केवल एक हमला नहीं था, बल्कि एक बड़े आतंकवादी नेटवर्क का हिस्सा था।


जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे थे। उनके पास विभिन्न मोबाइल फोन थे, जिनमें से एक सामान्य उपयोग के लिए और दूसरा गुप्त बातचीत के लिए था।


एजेंसी के अनुसार, आरोपी विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में थे और मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से निर्देश प्राप्त कर रहे थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहा था। लाल किला ब्लास्ट के बाद, देशभर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। एनआईए और अन्य एजेंसियां फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं। यह मामला यह दर्शाता है कि आतंकवादी संगठन अब तकनीक और शिक्षित व्यक्तियों का उपयोग कर नए तरीके से नेटवर्क बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतियां और बढ़ गई हैं।