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भारतीय कॉफी निर्यात पर संकट: फ्रेट लागत और समुद्री रुकावटें

भारतीय कॉफी निर्यातकों को बढ़ती फ्रेट लागत और समुद्री रुकावटों के कारण गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी सीजफायर के बावजूद व्यापार मार्गों में बाधाएँ बनी हुई हैं। भारत, जो दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक है, अपनी कुल कॉफी का लगभग 70 प्रतिशत निर्यात करता है। हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में निर्यात में वृद्धि हुई है, लेकिन निर्यातकों को चिंता है कि वे इस बाजार का 80 प्रतिशत हिस्सा खो सकते हैं। जानें इस संकट का भारतीय कॉफी उद्योग पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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भारतीय कॉफी निर्यात पर संकट: फ्रेट लागत और समुद्री रुकावटें

भारतीय कॉफी का संकट

दुबई, कुवैत सिटी और रियाद जैसे शहरों में भारतीय कॉफी की उपस्थिति पिछले कई दशकों से रही है, लेकिन अब निर्यातकों को चिंता है कि उनका सबसे तेजी से बढ़ता बाजार 80 प्रतिशत तक समाप्त हो सकता है। यह संकट बढ़ती फ्रेट लागत और समुद्री रुकावटों के कारण उत्पन्न हुआ है.


अमेरिका-ईरान वार्ता का प्रभाव

हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी सीजफायर हुआ है, व्यापार मार्ग अभी भी बाधित हैं। शिपिंग लागत में वृद्धि ने पूरी इंडस्ट्री पर दबाव डाला है। रविवार को पाकिस्तान में 21 घंटे की बातचीत के बाद भी कोई समझौता नहीं हो सका। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि ईरान ने अमेरिका की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है, जिससे कोई डील नहीं हो सकी.


होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट

भारतीय कॉफी निर्यातकों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट लंबे समय तक बनी रह सकती है। भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक देश है और अपनी कुल कॉफी का लगभग 70 प्रतिशत निर्यात करता है.


पश्चिम एशिया में निर्यात का भविष्य

पिछले एक दशक में भारत ने पश्चिम एशिया में अच्छी प्रगति की है। UAE, जॉर्डन और सऊदी अरब जैसे देशों ने 2024 में भारत के कुल कॉफी निर्यात का 16 प्रतिशत हिस्सा लिया। कॉफी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रमेश राजा ने कहा, 'आने वाले महीनों में हम पश्चिम एशिया के बाजार का 80 प्रतिशत तक हिस्सा खो सकते हैं।'


फ्रेट लागत में वृद्धि

भारतीय कॉफी का अधिकांश हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भेजा जाता है। शिपमेंट में देरी, मार्ग परिवर्तन और ट्रांसशिपमेंट पॉइंट पर रुकावटें हो रही हैं। बढ़ती फ्रेट लागत के कारण मुनाफा कम हो रहा है.


कॉफी निर्यात में स्वर्ण युग का खतरा

भारत का कॉफी क्षेत्र हाल के वर्षों में काफी विकसित हुआ है। 2023 में निर्यात से 1.14 अरब डॉलर की आय हुई, जो पिछले वर्ष 2.13 अरब डॉलर तक पहुंच गई। भारत हर साल 3.5 से 3.7 लाख मीट्रिक टन कॉफी का उत्पादन करता है, जो वैश्विक उत्पादन का 3-4 प्रतिशत है.


रोबस्टा कॉफी का उत्पादन

भारत अरेबिका और रोबस्टा दोनों प्रकार की कॉफी का उत्पादन करता है, जिसमें रोबस्टा का हिस्सा 70 प्रतिशत है। प्रीमियम रोबस्टा, जैसे मानसून मालाबार, इटली, जर्मनी और रूस में अच्छी बिक्री होती है। जापान को इंस्टेंट कॉफी भी निर्यात की जाती है.


पश्चिम एशिया में निर्यात का आंकड़ा

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में पश्चिम एशिया भारत के कॉफी निर्यात का 16.1 प्रतिशत था, जो 10 साल पहले 12.6 प्रतिशत था। इस क्षेत्र में अस्थिरता जारी है, जिससे भारतीय कॉफी निर्यातकों की चिंताएँ बढ़ गई हैं.